हजारीबाग से 72 किलोमीटर दूर बरकट्ठा में सूर्यकुंड मंदिर स्थित है. यहां मंदिर प्रांगण में 5 कुंड हैं. पहला सूर्य कुंड, दूसरा सीता कुंड, तीसरा ब्रम्हा कुंड, चौथा राम कुंड और पांचवां लक्ष्मण कुंड. इन कुंडों से निकलने वाले पानी का तापमान अलग-अलग होता है. सूर्यकुंड का पानी सबसे गर्म है. जिसका तापमान 88.5 डिग्री सेल्सीयस होता है. स्थानीय पुजारियों और लोककथाओं के अनुसार, यहां के कुंड के गर्म पानी से नहाने से 36 प्रकार की बीमारियों का उपचार होता है. जिसमें त्वचा रोग से लेकर गैस भी शामिल है.
मंदिर के पुजारी जीवलाल पाण्डेय बताते हैं कि भगवान श्री राम 14 वर्ष के बनवास के लिए जंगल गए थे. उसी वियोग के दुख में राजा दशरथ ने अपनी देह त्याग दी थी. प्रभु श्री राम को जब इस संबंध में जानकारी मिली तो वो उनका पिंड दान करने गया के फल्गु नदी किनारे पहुंचे थे. ठीक उसी समय ऋषि श्रवण कुमार सूर्यकुंड स्थान पर भगवान विष्णु की आराधना कर रहे थे. ऋषि श्रवण कुमार को दर्शन देने के लिए प्रभु श्री राम इस स्थान पर पहुंचे थे. लगातार कठोर तप के दौरान ऋषि श्रवण कुमार को कई प्रकार की बीमारी हो जाती हैं. भगवन श्री राम ऋषि श्रवण कुमार से वरदान मांगने को कहते हैं तो वो ऐसा जलकुंड मांगते है जिसमें नहाने से मानव जाति के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाएं. इसके बाद श्री राम ने वहां बाण मारकर सूर्यकुंड का निर्माण किया था.
कुंड के हैं कई रहस्य
मंदिर के पुजारी जीवलाल पाण्डेय कहते हैं कि इस कुंड और इसके जल के ऊपर कई बार विज्ञानकों ने शोध किया, लेकिन उनको भी खाली हाथ लौटना पड़ा. वे भी ये पता नहीं कर पायें इस कुंड के गर्म जल से स्नान मात्र से कैसे त्वचा के रोगों से मुक्ति मिलती है.
ठंड के दिनों में लगती है भीड़
पुजारी जीवलाल पाण्डेय बताते है कि जनवरी के माह में यहां 14 तारीक से 31 तारीक तक मेला लगता है. उस दौरान रोजाना लगभग 30 से 40 हज़ार लोग यहां स्नान करते हैं. गर्मी के दिनों में लोग सुबह-सुबह स्नान करते हैं.









