मनोज मुंतशिर की असलियत सामने आ गई है, गजेंद्र चौहान ने लगाई आदिपुरुष के मेकर्स को फटकार, बोले- नए डायलॉग भी चोरी…

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आदिपुरुष को लेकर कई जनता ही नहीं कई बड़े एक्टर भी ओम राउत (Om Raut), मनोज मुंतशिर शुक्ला और फिल्म के कलाकारों से नाराज चल रहे हैं. हर तरफ फिल्म को बैन किए जाने की मांग उठ रही है. कई जगह तो फिल्म को बैन किया भी जा चुका है. फिल्म में कलाकारों के लुक, डायलॉग और वीएफएक्स जनता को पसंद नहीं आ रहे हैं. लोगों का गुस्सा देख ओम राउत ने फिल्म के विवादित डायलॉग आनन-फानन में बदल तो दिए, लेकिन इसके बाद भी जनता शांत नहीं हुई है. दूसरी तरफ इस पर अब ‘महाभारत’ के ‘युधिष्ठिर’ गजेंद्र चौहान ने भी अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है.

गजेंद्र चौहान का मानना है कि इस तरह की फिल्में लोगों की भावनाओं का मजाक उड़ाती हैं. आदिपुरुष की राइटिंग पर भी गजेंद्र चौहान ने सवाल खड़े किए हैं. आजतक से बातचीत में गजेंद्र ने फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी और मेकर्स और फिल्म के राइटर को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की.

गजेंद्र चौहान कहते हैं- ‘सबसे पहले तो मैं ये कहना चाहता हूं की रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य की कहानियां हमारे संस्कारों और सभ्यता से जुड़ी हैं. इस तरह से उनके साथ खिलवाड़ किसी को बर्दाश्त नहीं होगा. रामायण और महाभारत देखने की चीज नहीं है, ये सीखने की चीज है. हम अपनी आने वाली जनरेशन को ये विरासत के तौर पर देकर जाते हैं. ये तो हमारे देश की धरोहर है, जिसे संभालकर रखा चाहिए. इससे कभी कोई गलत मैसेज नहीं देना चाहिए.’

टिकट खरीदने के बाद भी नहीं देखी फिल्म
गजेंद्र आगे कहते हैं- ‘मैंने इस फिल्म को देखने के लिए टिकट बुक कराई थी, लेकिन फिर पता नहीं क्यों मेरी आत्मा गवारा नहीं कर रही कि मैं ये फिल्म थिएटर जाकर देखूं. दरअसल, मैंने जो भी ट्रेलर और छोटी-मोटी क्लिप देखी हैं, वो सब देखने के बाद मुझे अहसास हुआ कि यह फिल्म उस लायक है ही नहीं कि इसे थिएटर में जाकर देखा जाए. मैं अपनी मान्यता को खत्म नहीं कर सकता. मैं राम को प्रभु श्री राम के रूप में ही देखना चाहता हूं.’

‘मुझे तो लगता है इस फिल्म के पीछे कोई गहरी साजिश है. वो हमारी आने वाली पीढ़ी को बर्बाद करना चाहते हैं. मैं भूषण जी से कहना चाहता हूं कि जैसे उनके पिता ने लेगेसी बढ़ाई है, उन्हें भी धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए. आने वाले समय में ऐसी चीजों को बिलकुल बढ़ावा नहीं देना चाहिए.’

सभी सजा के पात्र हैं
डायलॉग में सुधार पर गजेंद्र चौहान ने कहा- ‘धनुष से तीर निकल चुका है, जो डैमेज होना था हो गया. अब वो कुछ भी कर लें, कोई फायदा नहीं होगा. लोगों ने आदिपुरुष को तो सजा दे ही दी है, ये भी सजा के पात्र हैं. उन्हें सजा तो मिलनी ही चाहिए. बल्कि सेंसर बोर्ड के डिसीजन पर भी सवाल खड़ा किया जाना चाहिए. मनोज मुंतशिर ने अज्ञानता का परिचय दिया है. उन्हें कोई नॉलेज नहीं है. वो एक संगीतकार हैं, जिनसे संवाद लिखवा दिए गए हैं. जो राइटर, वक्ता के वीडियो सोशल मीडिया पर चलते हैं उन्होंने वही डायलॉग उठाकर फिल्म में जोड़ दिए हैं. कुमार विश्वास का डायलॉग है ना ‘तेरी लंका लगा दूंगा.’ सबको जोड़कर उन्होंने ऐसे पेश किया है कि सब उन्होंने ही लिखा है. वो जिद पर अड़ गए हैं. ये अहंकार किसी कलाकार के लिए अच्छा नहीं है.’

 

 

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