छत्तीसगढ़ के वन विभाग में इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहा। और चले भी कैसे जब सरकार ने ही सीनियर अफसरों को किनारा करते हुए। सात अफसरों के जूनियर को पीसीसीएफ (वन बल प्रमुख) दिया हो। राव के पीसीसीएफ बनाते ही वन विभाग में खुल्ला खेल चालू हो गया। अभी तक रेंजरों के वित्तीय अधिकार छीनने की खबरें सामने आती थी अब डीएफओ के भी वित्तीय अधिकार छीन लिए जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि वास्तव में यदि किसी अधिकारी द्वारा वित्तीय अनियमितता की गई है तो उसकी विभागीय जांच होनी चाहिए। उसे नोटिस दी जानी चाहिए। जवाब तलब होने चाहिए। जांच उपरांत कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है अधिकारियों को नोटिस तक नहीं दिया जा रहा। मुख्यालय के इशारे पर सीधा मनमर्जी तरीके से उनके वित्तीय अधिकार छीनकर किसी अन्य अफसर को सौंप दिया जा रहा है।
बस्तर सीसी ऐप मोहम्मद शाहिद ने जगदलपुर डीएफओ भुनेश्वर साहू के वित्तीय अधिकार छीने

बस्तर सीसीएफ मोहम्मद शाहिद ने वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए जगदलपुर डीएफओ कुलेश्वर साहू के वित्तीय अधिकार छीनकर आईएफएस दिव्या गौतम को सौंप दिया साथ ही दुलेश्वर साहू को भारी-भरकम रकम जमा कराने का आदेश भी जारी कर दिया गया। वास्तव में यदि तुलेश्वर साहू ने वित्तीय अनियमितता की है तो विभागीय जांच होनी चाहिए थी, उन्हें पद से हटाना चाहिए था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ सीधा उनका वित्तीय अधिकार छीनकर किसी अन्य अफसर को दे दिया गया इसके पीछे क्या कारण है यह तो विभाग के कर्ताधर्ता ही जानेंगे। लेकिन इस आदेश के बाद विभाग में नई परंपरा शुरू हो गई अब कोई भी सीसीएफ किसी भी डिएफओ के वित्तीय अधिकार छीन सकता है।
रायपुर सीसीएफ केआर नायक ने बलौदा बाजार डीएफओ मयंक अग्रवाल का विक्की पावर छीना

ऐसा ही एक मामला रायपुर सीसीएफ कार्यालय का सामने आया है जहां पर सीसीएफ जे आर नायक ने बलौदा बाजार डीएफओ मयंक अग्रवाल के वित्तीय अधिकार छीन कर रायपुर डीएफओ विश्वेश्वर कुमार को सौंप दिया है। जानकारी के अनुसार बलौदाबाजार डीएफओ पर भी वित्तीय अनियमितता और बजट नियंत्रण के आरोपों के चलते रायपुर सीसीएफ ने यह कार्यवाही की है। यहां भी डीएफओ को किसी भी तरह की कोई अनियमितता की नोटिस पूर्व में जारी नहीं की गई है। और ना ही कोई जांच हुई। सीधा बस्तर सीसीएफ के आर्डर को केस बनाते हुए डीएफओ मयंक अग्रवाल के भी वित्तीय अधिकार छीन लिए गए।
श्रीनिवास राव के आदेश ने फंसाया पेच

दरअसल में इस परंपरा के वाहक स्वयं श्रीनिवास राव ही हैं श्रीनिवास राव ने बस्तर सीसीएफ को एक पत्र लिखा है जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि 74 टीओ 16 के तहत वित्तीय अधिकार के लिए सीसीएफ सक्षम है। जिसके आधार पर बस्तर सीसीएफ मोहम्मद शाहिद नहीं भुनेश्वर साहू के वित्तीय अधिकार छीन लिए। अब राव का यही आदेश रायपुर में पेच फंसा दिया है। कहते हैं कि जब जेआर नायक ने बलौदा बाजार डीएफओ के वित्तीय अधिकार छीने तो मामला पीसीसीएफ श्रीनिवास राव के पास पहुंचा और उन्होंने सीसीएफ को आदेश निरस्त करने के लिए 20.6.2023 को पत्र लिखा लेकिन जब नायक ने आर्डर को निरस्त नहीं किया तो 21.6.2023 को पीसीसीएफ का दूसरा पत्र पहुंचा जिसमें एक लाइन का आदेश जारी करते हुए सीसीएफ नायक के आदेश को निरस्त कर दिया गया। सवाल यह उठता है कि बस्तर सीसीएफ वित्तीय अधिकार के लिए सक्षम है तो रायपुर सीसीएफ क्यों नहीं? इसीको लेकर इन दिनों पेंच फंसा हुआ है। इस मामले में आगे क्या होगा यह तो आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन राव के एक पत्र ने सभी डीएफओ के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। अब कोई भी सीसीएफ किसी भी डीएफओ का वित्तीय अधिकार छीन सकता है।
क्या कहता है वित्तीय नियम ?

वित्तीय नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी को आहरण एवं संवितरण अधिकारी घोषित करने का अधिकार प्रशासनिक विभाग को होता है। वहीं वन विभाग के सीनियर अधिकारियों का भी मानना है कि यह अधिकार शासन को है। दोनों मामलों पर जो आदेश जारी किए गए हैं वह अनुचित है। किसी अधिकारी के वित्तीय अधिकार ऐसे नहीं छीने जा सकते।









