बाबा विश्वनाथ की हर रोज पांच आरती होती है. मंगला आरती से बाबा विश्वनाथ का कपाट भक्तो के लिए खुलता है. उसके बाद दोपहर के भोग और शाम को सप्तऋषि फिर रात में श्रृंगार और शयन आरती की जाती है. इन आरती में सप्तऋषि आरती सबसे खास होता है.
इस आरती को अलग अलग क्षेत्र के सात ऋषि या ब्राह्मण करते हैं, जो अलग-अलग गोत्र के होते हैं. ये सभी ऋषि अलग-अलग रास्ते से डोली लेकर बाबा के मंदिर पहुंचतें है. काशी विश्वनाथ मंदिर में ये परम्परा 750 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है. हर कोई इसका साक्षी बनना चाहता है.
यह आरती शाम 7 बजे शुरू होती है, जो सवा घंटे यानी रात 8 बजकर 15 मिनट तक चलती है. आम दिनों में इस आरती में शामिल होने के लिए 180 रुपये का टिकट लेकर श्रद्धालु इस आरती में शामिल हो सकतें है.
सप्तऋषि आरती में बाबा को प्रिय भांग, ठंडाई के अलावा और भी बनारसी व्यंजन का भोग लगाया जाता है. इस आरती के बाद रात 9 बजे से शयन एवं भोग आरती शुरू होती है. इसके बाद रात में काशी वासी बाबा को शयन कराने आते हैं, जिसे शयन आरती के कहा जाता है.
इस आरती में बाबा को गंगा जल के साथ विभिन्न चीजों से अभिषेक किया जाता है. उसके बाद उन्हें भोग लगता है और फिर सभी सात ऋषि उनकी आरती करतें हैं. इनमें मंदिर प्रशासन द्वारा नियुक्त अर्चक शामिल नहीं होते हैं.









