पर्यावरण पार्क बालोद में हुए भ्रष्टाचार से अब उठेगा पर्दा

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क्या इस बार जांच की आंच “बड़े नामों” तक पहुंचेगी?

वन मंडल बालोद के पर्यावरण पार्क में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार/फर्जीवाड़े की शिकायत पर शासन हुआ सख्त ।

इन बिन्दुओं पर विशेष जांच की आवश्यकता। 👇

1. वित्तीय गबन
2. फर्जी परिवहन
3. गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य
4. फर्जी सत्यापन
5. विशिष्ट मदवार अनियमितताए
6. खनिज न्यास निधि (DMFT) का दुरुपयोग
7. फर्जी मजदूरी भुगतान

“तहलका पत्रिका” द्वारा इन प्रमुख कार्यालयों में मय शपश-पत्र व साक्ष्यों के साथ की गई थी लिखित शिकायत।

मननीय प्रधानमंत्री कार्यालय
महामहिम राज्यपाल कार्यालय
मुख्यमंत्री कार्यालय
सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
वनमंत्री छ.ग.शासन
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन/बल
प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास योजना/ बजट
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सर्तकता शिकायत
मुख्य वन संरक्षक क्षेत्रीय कार्यालय

भ्रष्टाचार की शिकायत पर शासन व उच्च विभाग के संज्ञान में आते ही तत्काल प्रभाव से शिकायत की निष्पक्ष जांच के लिए पत्रों का दौर शुरु हो चुका है।

अब देखना ये है की उक्त शिकायत पर किनती ईमानदारी व निष्पक्षता से जांच की जाती है व दोषी पाये जाने वालों पर क्या कार्यवाही की जाती है ?

शासन को गुमराह कर भ्रष्टाचार को दिया गया अंजाम।

संभावित प्रभाव

1 वित्तीय गबन सरकारी खजाने को सीधी क्षति।

2 फर्जी परिवहन कागजों पर गाड़ियों का फर्जी नं. डालकर चलना दिखाकर ईंधन और किराए की चोरी।

3 गुणवत्ता विहीन निर्माण पार्क के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का भविष्य में असुरक्षित होना।

4 फर्जी मजदूरी (Master Roll) वास्तविक मजदूरों के बजाय फर्जी नामों पर भुगतान करना।

5 DMFT निधि का दुरुपयोग प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित राशि का गलत इस्तेमाल।

शासन की वर्तमान सक्रियता
​चूंकि शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राज्यपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँच चुकी है,

​मौका मुआयना:

उच्च जांच दल द्वारा पार्क में जाकर निर्माण कार्यों की भौतिक जांच।

​दस्तावेजों की जब्ती:

वाउचर, मस्टर रोल और लॉग बुक का मिलान।

​तकनीकी ऑडिट:

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब टेस्टिंग।

दोषी पाये जाने पर :

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के तहत, यदि बालोद वन मंडल के इस मामले में अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं, तो उन पर दो प्रकार के दंड (Penalties) लगाए जा सकते हैं:


​1. लघु दंड (Minor Penalties)
​यदि अनियमितता प्रक्रियात्मक चूक (Procedural error) तक सीमित है, तो ये दंड दिए जाते हैं:
​परिनिंदा (Censure): सेवा रिकॉर्ड में आधिकारिक रूप से कड़ी फटकार दर्ज करना।

​पदोन्नति रोकना:

एक निश्चित समय के लिए प्रमोशन पर रोक।
​वेतन वृद्धि रोकना (Withholding of Increments): बिना संचयी प्रभाव के वार्षिक वेतन वृद्धि रोकना।

​आर्थिक वसूली:

लापरवाही या आदेशों के उल्लंघन के कारण सरकार को हुए वित्तीय नुकसान की वसूली सीधे कर्मचारी के वेतन से करना।

​2. दीर्घ दंड (Major Penalties)
​चूंकि यहाँ वित्तीय गबन और फर्जीवाड़े जैसे गंभीर आरोप हैं, तो जांच सिद्ध होने पर ये सख्त कदम उठाए जा सकते हैं:

​निचले पद पर अवनति (Demotion): पद और वेतनमान को कम कर देना।
​अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement): सेवा अवधि पूरी होने से पहले ही रिटायर कर देना।

​सेवा से हटाया जाना (Removal from Service):
नौकरी से निकाल देना (इसमें भविष्य में दूसरी सरकारी नौकरी मिलने की संभावना रहती है)।

​सेवा से बर्खास्तगी (Dismissal): यह सबसे कठोर दंड है। इसके बाद व्यक्ति भविष्य में किसी भी सरकारी पद के लिए अयोग्य हो जाता है।

​भ्रष्टाचार के मामलों में विशेष कानूनी कार्यवाही
​विभागीय कार्यवाही के अलावा, ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत अलग से कानूनी प्रक्रिया भी चल सकती है:

​FIR और आपराधिक मामला:

यदि फर्जी बिल और कूट रचित दस्तावेज (Forgery) पाए जाते हैं, तो आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) मामला दर्ज कर सकती है।

​निलंबन (Suspension): जांच के दौरान साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा सकता है।

​पेंशन रोकना:

यदि आरोपी सेवानिवृत्त हो चुका है, तो सरकार उसकी पेंशन का हिस्सा या पूरी पेंशन रोकने का अधिकार रखती है।

​विशेष विचारणीय प्रश्न:

अक्सर ऐसी जांचों में निचले स्तर के कर्मचारियों को मोहरा बनाया जाता है, जबकि उच्चाधिकारियों की संलिप्तता पर्दे के पीछे रह जाती है। क्या इस बार जांच की आंच “बड़े नामों” तक पहुंचेगी?
​यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या विभाग बाहरी स्वतंत्र एजेंसी से इसकी जांच कराता है या विभागीय जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है।यह आने वाला समय ही बतायेगा, परंतु आमजन की नजर इस जांच पर टीकी हुई है।

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