केंद्र सरकार भी एक्शन के मुड में।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की पर्यावरण पार्क बालोद में हुए भ्रष्टाचार/फर्जीवाड़े में सीधा दखल

आमतौर पर स्थानीय शिकायतों पर राज्य स्तर से कार्यवाही शुरू होती है, लेकिन “तहलका पत्रिका” की शिकायत पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने सीधे संज्ञान लेते हुए
PMO ने सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को इस संबंध में जांच और आवश्यक कार्यवाही के लिए औपचारिक पत्र प्रेषित किया है।
‘तहलका’ पत्रिका की भूमिका
शिकायत का आधार ‘तहलका’ पत्रिका द्वारा उठाए गए मुद्दे हैं। जिसकी शिकायत पर केंद्र की मुहर लगना यह दर्शाता है कि उठाए गए बिंदु गंभीर और साक्ष्यों पर आधारित हैं।
पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश
PMO ने केवल जांच के निर्देश ही नहीं दिए हैं, बल्कि सचिव छ.ग. शासन को निर्देशित किया है कि इस शिकायत पर की गई पूरी कार्यवाही की रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाए। इससे मामले में पारदर्शिता बनी रहेगी और केंद्र सीधे इसकी निगरानी कर सकेगा।
स्थानीय प्रशासन पर दबाव
राज्य सरकार की सक्रियता से पहले ही केंद्र का पत्र आ जाना स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित विभाग के लिए एक चेतावनी की तरह है।
राज्य शासन को लेना होगा एक्शन:
अब छत्तीसगढ़ शासन के साथ साथ संबंधित उच्च विभाग को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी की प्रक्रिया करनी होगी।
PMO कार्यालय की कार्यवाही के मायने:
जब PMO सीधे किसी राज्य के सचिव को पत्र लिखते हैं, तो इसका मतलब है कि शिकायत में दिए गए साक्ष्य प्रथम दृष्टया काफी मजबूत हैं।
एक नजर: 👇
‘तहलका’ पत्रिका द्वारा पर्याप्त साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी।
PMO का हस्तक्षेप: 👇
यह मामला दिल्ली पहुँचा, जहाँ प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस पर त्वरित संज्ञान लिया।









