छुईखदान में बड़ा फर्जीवाड़ा

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वन परिक्षेत्र छुईखदान में व्यापक रुप से हुए फर्जीवाड़े का बहुत जल्द खुलासा।

नही बख्शे जायेंगे भ्रष्टाचारी

फर्जी मस्टर रोल:

400-500 किमी दूर रहने वाले व्यक्तियों के नाम पर मजदूरी का भुगतान दिखाना तकनीकी रूप से “घोस्ट वर्कर्स” (Ghost Workers) का मामला है।

हितों का टकराव (Conflict of Interest):

अपने करीबियों के खातों में सरकारी पैसा डालना पद का दुरुपयोग है।

धरातल पर कार्य की कमी:

कागजों पर 100% कार्य दिखाकर जमीन पर केवल 15-20% कार्य करना सरकारी संपत्ति की चोरी है।

वन विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा:

फर्जी मस्टरोल के जरिए लाखों का ‘बंदरबांट’

वन मंडल खैरागढ़ के वन परिक्षेत्र छुईखदान में सरकारी धन के गबन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि वन परिक्षेत्र अधिकारी और उनके सहयोगियों ने मिलीभगत कर धरातल पर बिना कार्य किए शासकीय राशि का जमकर दुरुपयोग किया है।

फर्जी मजदूरी का मायाजाल:

दस्तावेजों की जांच पड़ताल एवं स्थल निरीक्षण में यह बात सामने आई है कि विभाग द्वारा कराए गए कार्यों में फर्जी मस्टरोल तैयार किए गए। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि मजदूरी का भुगतान उन व्यक्तियों के खातों में किया गया है जो कार्यस्थल से 400-500 किलोमीटर दूर निवास करते हैं। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने अपने करीबियों और परिचितों को ‘काल्पनिक मजदूर’ बनाकर लाखों रुपये उनके खातों में ट्रांसफर कर दिए।

धरातल पर काम शून्य, कागजों में पूर्ण

क्षेत्रीय निरीक्षण और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जिन कार्यों के लिए लाखों का बजट जारी हुआ था, धरातल पर उनमें से केवल 15-20% कार्य ही संपन्न हुआ है। शेष राशि को मिलीभगत कर आपस में बांट लिया गया।

इन कानूनी धाराओं के तहत हो सकती है कार्रवाई
इस प्रकार के गबन और धोखाधड़ी के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS)—जो पूर्व में IPC थी—के तहत निम्नलिखित धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है:

प्रशासनिक रुख:

मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी की सेवा समाप्ति के साथ-साथ जेल की सजा भी तय की जा सकती है।

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