“अस्तित्व में ही नही है “वन विद्यालय” कार्यालय अंबिकापुर
केवल कागजों में रहा जीवित।
विधि विरुद्ध स्थानांतरण कर शासन को किया गया गुमराह ।
कार्यालय अस्तित्व में ही नही और कराया गया स्थानांतरण ।
राज्य शासन के साथ साथ केन्द्र सरकार के संज्ञान में लाया जायेगा गुम हुए कार्यालय का मामला।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन/बल द्वारा अपने पत्र क्रमांक/प्रशा.राज्य/न क्र.-53/2624/7190 नवा रायपुर दिनांक 09-07-2025 को अपर सचिव छ.ग. शासन जलवायु परिवर्तन विभाग मंत्रालय महानदी भवन रायपुर को सहायक वनरक्षकों के रिक्त पदों की जानकारी संलग्न कर नवीन पदस्थापना करने अनुमोदित पत्र प्रस्तुत किया गया, जिस के उपरांत
छ.ग.शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग महानदी भवन,नवा रायपुर अटल नगर के आदेश क्रमांक :: ESTB-102 (2) 329/2025 FOREST-नवा रायपुर दिनांक 31-07-2025 को प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित कराते हुए 41 वन अधिकारियों का छ.ग. के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार श्री डी.आर. सोन्टापर अवर सचिव छ.ग. शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के डिजिटल हस्ताक्षर से पेज क्रमांक 1 से 5 तक क्रमशः 40 अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश पारित कराया गया ।
जिसके पेज क्रमांक 03 के कॉलम क्रमांक 31 में श्री एम.आर. साहू (वर्तमान में पदस्थापना सहायक संचालक सीतानदी अभ्यारण नगरी,उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व गरियाबंद) से नवीन पदस्थापना- अनुदेशक “वन विद्यालय” अंबिकापुर/सरगुजा किया गया है। जहां उक्त कार्यालय ही नही है।
नये “वन विद्यालय” में संविदा से भर्ती सेटअप/ नियुक्ति प्रक्रिया को छ.ग. शासन वन विभाग मंत्रालय महानदी भवन रायपुर के पत्र क्रमांक एफ 03-23/2012/10-1/वन नया रायपुर दिनांक 23-06-2017 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र जारी करते हुए लेख किया गया की अप्रशिक्षित वनरक्षकों की कमी के कारण 03 नये खोले गये वन विद्यालयों में व्याख्याता संविदा नियुक्ति हेतु आरंभ की गई प्रक्रिया को स्थगित किया जाता है- यह पत्र श्री एम.एन. राजूरकर अवर सचिव छ.ग. शासन वन विभाग द्वारा जारी किया गया।
उक्त “वन विद्यालय” कार्यालय अंबिकापुर/सरगुजा वर्ष 2017 में स्थगित होने के पश्चात “वन विद्यालय”अस्तित्व में आया ही नही तथा आज दिनांक तक उक्त विद्यालय अस्तित्व में नही है
ज्ञात हो की पूर्व में पदस्थ रहे प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री आर.के. टम्टा द्वारा अपने पत्र क्रमांक /714 रायपुर दिनांक 11-05-2017 को तालिका-1 अनुसार शक्ति,महासमुंद एवं जगदलपुर में अप्रशिक्षित वनरक्षकों को प्रशिक्षण हेतु पर्याप्त अधोसंरचना उपलब्ध है के कारण प्रशिक्षण करायें जाने का निर्णय लिया गया तथा यह भी स्पष्ठ लेख किया गया की 01 जुलाई 2017 से प्रारंभ होने वाले वनरक्षक प्रशिक्षण सत्र में कवर्धा,भानुप्रतापपुर एवं अंबिकापुर में प्रशिक्षण हेतु कोई भी अप्रशिक्षित वनरक्षक नही भेजे जायेगें।…. चूंकि अंबिकापुर “वन विद्यालय” स्थगित होने के कारण अस्तित्व में नही आया है।
31-07-2025 के स्थानांतरण आदेश से आज दिनांक तक
स्थानांतरण हुए अधिकारी द्वारा “वन विद्यालय” कार्यालय को खोजा जा रहा है ताकि शासन के निर्देश 10 दिन के भीतर प्रभार लेने के आदेश का पालन कर सके।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन/बल द्वारा उस कार्यालय में गलत अनुमोदन कराकर स्थानांतरण किया गया है जो अस्तित्व में ही नही है । इससे यह दो चीजें सामने आती हैं कि या तो वन मुखिया को जानकारी का आभाव है या फिर द्वेष के कारण उस अधिकारी का स्थानांतरण किया गया है ।अब देखना ये है की लोग इस विषय को किस नजरिये से सोचते और देखते हैं।
जबकि….
छ.ग. शासन वन विभाग मंत्रालय दाऊ कल्याण सिंह भवन रायपुर के अपर सचिव श्री एम.एल. ताम्रकार छ.ग. शासन वन विभाग के ज्ञापन एफ J23/2012/10-1/वन रायपुर दिनांक 05-05-2012 के माध्यम से प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिख कर कांकेर,कवर्धा व अंबिकापुर को प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना कैम्पा निधि मद से किये जाने हेतु प्रति केन्द्र -13 पदों की सहमति वित्त विभाग के यू.ओ. क्रमांक/350/सी.एम. बजट -2 वित्त / भार 2012 दिनांक 28-04-2012 के माध्यम से प्रदान कराई तथा इस पद हेतु संपूर्ण व्यय कैम्पा फंड से भारित होगा एवं राज्य बजट से कोई राशि देय नही होगी तथा वन मंडलाधिकारी प्रशिक्षण केन्द्र में पदेन संचालक होगें।
यह आदेश उक्त वन विद्यालयों के अस्तित्व में लाने हेतु जारी किया गया था। परंतु (उक्त कार्यालय “वन विद्यालय” अंबिकापुर/सरगुजा वर्ष 2017 में स्थगित होने के पश्चात नया “वन विद्यालय”अस्तित्व में आया ही नही तथा आज दिनांक तक उक्त विद्यालय अस्तित्व में नही है।
नये “वन विद्यालय” में संविदा से भर्ती सेटअप/ नियुक्ति प्रक्रिया को छ.ग. शासन वन विभाग मंत्रालय महानदी भवन रायपुर के पत्र क्रमांक एफ 03-23/2012/10-1/वन नया रायपुर दिनांक 23-06-2017 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र जारी करते हुए लेख किया गया की अप्रशिक्षित वनरक्षकों की कमी के कारण 03 नये खोले गये वन विद्यालयों में व्याख्याता संविदा नियुक्ति हेतु आरंभ की गई प्रक्रिया को स्थगित किया जाता है- यह पत्र श्री एम.एन. राजूरकर अवर सचिव छ.ग. शासन वन विभाग द्वारा जारी किया गया।)
इस प्रकार “वन विद्यालय” अंबिकापुर अस्तित्व में आने से पहले ही स्थगित कर दिया गया और आज परियांत अंबिकापुर में कोई “वन विद्यालय” कार्यालय संचालित नही है।









