250 करोड़ का टेंडर और हयात की ‘फिक्सिंग’:
मंत्री के इशारे पर वन विभाग के ठेकेदारों ने बुक किया 5-स्टार होटल, ‘सिंडीकेट’ का खेल बेनकाब!
”तुम्हारे हिसाब से हो जाएगा…” — बस इतना सुनते ही ठेकेदारों ने बुक कर लिया 5-स्टार होटल!
रायपुर : छत्तीसगढ़ के वन विभाग में भ्रष्टाचार और टेंडर मैनेज करने का एक बड़ा खेल सामने आया है। आने वाले मार्च तक होने वाले लगभग 250 करोड़ रुपए के सप्लाई और टेंडर को अपने चहेतों में बांटने के लिए रायपुर के मशहूर होटल हयात में एक हाई-प्रोफाइल सिंडीकेट बैठक हुई।
फिल्म ‘पुष्पा’ की तर्ज पर हुए इस सिंडीकेट में वन विभाग के खास ठेकेदार और मंत्री के करीबी लोग शामिल हुए। इस पूरी सीक्रेट मीटिंग के सियासी गलियारों में कई गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।
मीटिंग की अंदर की मुख्य बातें (Key Highlights):
लीड कर रहे थे ‘विशेषज्ञ’: इस गुप्त बैठक का संचालन प्रियदर्शन ग्रहाचार्य कर रहे थे, जो आरएफपी (RFP) और जैम (GeM) पोर्टल के विशेषज्ञ हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिनकी जिम्मेदारी टेंडर में पारदर्शिता लाने की है, वही इस सिंडीकेट की अगुवाई कर रहे थे।
कमिशन का फिक्स गणित:
वन विभाग के मंत्री केदार कश्यप के नाम पर कमिशन का हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए युवा मोर्चा के प्रदेश सह-कोषाध्यक्ष कीर्ति पाढ़ी को विशेष तौर पर बैठाया गया था।
जिम्मेदारियों का बंटवारा:
विभाग की ओर से प्रियदर्शन ग्रहाचार्य और मंत्री की ओर से कीर्ति पाढ़ी और शैलाभ साहु को संगठित रूप से ‘हिस्सा’ निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
होटल हयात में चली मैराथन बैठक:
14 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे से शुरू हुई इस क्लोजडोर मीटिंग में यह तय हुआ कि किस ठेकेदार को कौन सा काम मिलेगा। नियमों (Term & Conditions) में ऐसे बदलाव करने पर चर्चा हुई जिससे सिर्फ सिंडीकेट के चुनिंदा लोग ही क्वालिफाई कर सकें।
एडवांस कमिशन पर हंगामा:
बैठक के दौरान कमिशन की राशि एडवांस में देने को लेकर काफी गहमागहमी भी हुई, लेकिन 250 करोड़ के बड़े मुनाफे का लालच देकर मामला शांत करा लिया गया।
काम का हो गया है पूरा ‘बंटवारा’:
पोल (खंभा) सप्लाई: यह काम केवल 7 ठेकेदारों के बीच बांटा जाएगा।
बार्बेट वायर और चेन लिंक सप्लाई: इस पर केवल 10 व्यापारी ही राज करेंगे।
डमी ठेकेदारों का खेल: मंत्री के कुछ चहेते कार्यकर्ताओं को उपकृत करने के लिए कई ठेकेदारों को केवल ‘डमी’ (बिल और फॉर्म भरने वाले) की भूमिका में रहने का दबाव बनाया गया है, जबकि असली काम कार्यकर्ता संभालेंगे।
ज्ञात हो की “तहलका राष्ट्रीय पत्रिका” ने पूर्व में ही समाचार के माध्यम से ध्यानाकर्षण कराने का प्रयास किया था की छत्तीसगढ़ में वन विभाग में करोड़ों अरबों के खरीदी का खेल चल रहा है








