आस्था के केंद्र महामाया मंदिर में बिक रहे प्रसाद को लेकर बड़ा खुलासा, लैब जांच में मोतीचूर के लड्डू फेल. मिले कैंसर और सिरदर्द बढ़ाने वाले केमिकल

Spread the love

अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक अम्बिकापुर स्थित मां महामाया मंदिर के प्रसाद को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. मंदिर परिसर के सामने स्थित एक दुकान से लिए गए मोतीचूर के लड्डू का सरकारी लैब टेस्ट सैंपल पूरी तरह फेल हो गया है. जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लड्डू को ज्यादा मीठा और चमकदार बनाने के लिए तय मानकों से कई गुना ज्यादा खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जा रहा था. इस रिपोर्ट के आते ही खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित दुकान के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना शुरू कर दिया है.
भोपाल की लैब से आई डराने वाली रिपोर्ट
मिली जानकारी के मुताबिक रामनवमी के पर्व के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने महामाया मंदिर के सामने स्थित दुकानों से प्रसाद के रूप में बिकने वाले मोतीचूर के लड्डुओं के सैंपल कलेक्ट किए थे. इन सैंपलों को विस्तृत जांच के लिए भोपाल स्थित सरकारी मान्यता प्राप्त अत्याधुनिक लैब में भेजा गया था. अब जो जांच रिपोर्ट सामने आई है. उसने श्रद्धालुओं और स्वास्थ्य विभाग दोनों की चिंता बढ़ा दी है. लड्डू में मिलाए गए तत्व खाद्य सुरक्षा मानकों (FSSAI) के अनुरूप बेहद असुरक्षित पाए गए हैं.
मानकों से 11 गुना ज्यादा मिला सिंथेटिक कलर
सरगुजा खाद्य सुरक्षा विभाग की अधिकारी लक्ष्मी यादव ने इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि लैब टेस्ट में लड्डू के भीतर मुख्य रूप से दो हानिकारक तत्व अपनी तय सीमा से कहीं ज्यादा तादाद में मिले हैं.
एसपार्टेम (कृत्रिम स्वीटनर): यह एक तरह की आर्टिफिशियल शक्कर होती है, जिसका उपयोग मिठास बढ़ाने के लिए किया जाता है. नियमों के मुताबिक इसकी अधिकतम सीमा $1000 \text {mg/kg}$ होनी चाहिए. लेकिन जांचे गए सैंपल में यह $1700 \text{ mg/kg}$ पाई गई.
सनसेट येलो (सिंथेटिक फूड कलर): लड्डू को आकर्षक और गाढ़ा पीला/नारंगी रंग देने के लिए इस केमिकल कलर का इस्तेमाल किया गया था. इसकी स्वीकृत मात्रा महज $100 \text { mg/kg}$ है. लेकिन लैब में यह $1100 \text { mg/kg}$ पाई गई. जो कि तय मानक से 11 गुना ज्यादा है.
सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं ये केमिकल्स
डॉक्टरों और खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी ज्यादा तादाद में एसपार्टेम और सनसेट येलो कलर का सेवन करना मानव शरीर के लिए जहर के समान है. इसके लगातार इस्तेमाल से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा यह केमिकल तुरंत प्रभाव से तेज सिरदर्द, माइग्रेन, पेट की खराबी और एलर्जी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है.
खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, अन्य दुकानें भी रडार पर
सैंपल के ‘असुरक्षित’ और फेल घोषित होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित दोषी दुकानदार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (Food Safety and Standards Act) के तहत कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है. इस खुलासे के बाद प्रशासन कोई ढील नहीं बरत रहा है. एहतियात के तौर पर महामाया मंदिर परिसर के आस-पास संचालित होने वाली अन्य सभी प्रसाद और मिठाई दुकानों से भी दोबारा नए सैंपल लिए गए हैं और उन्हें तत्काल जांच के लिए भेज दिया गया है. विभाग ने साफ किया है कि आस्था के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

Author