पूजा, शादी और त्योहार पर महिलाएं क्यों लगाती हैं पैरों में महावर

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हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ और तमाम त्योहारों पर महिलाएं श्रृंगार करने के दौरान पैरों में महावर भी लगाती हैं. इतना ही नहीं शादी-विवाह के दौरान भी महावर लगाना जरूरी माना जाता है. लेकिन बहुत लोग खास कर आज कल के युवा, इस बात से अनजान हैं कि आखिर महावर  लगाने के पीछे की वजह क्या है. तो आइये आज हम आपको इस बारे में बताते हैं. लेकिन इससे पहले ये जान लें कि महावर को आलता के नाम से भी जाना जाता है.

कई राज्यों में किसी शुभ कार्य और पूजा के दौरान महावर लगाना शुभता का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है उत्तर प्रदेश सहित बिहार, ओडिशा और बंगाल जैसी जगहों पर आलता के बिना दुल्हन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है. इतना ही नहीं ओडिशा और बंगाल में केवल पैरों में ही नहीं, बल्कि दुल्हन के हाथों में भी आलता लगाने की परंपरा है. तो आइये इस बारे में ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से जानते हैं कि महावर लगाने की वजह क्या है और इसको किस दिन अप्लाई नहीं करना चाहिए.

सोलह श्रृंगार का खास हिस्सा है महावर
महावर को सोलह श्रृंगार का हिस्सा माना जाता है. सुहागन महिलाओं के लिए महावर लगाना जरूरी होता है. सौभाग्य में वृद्धि के लिए होने वाली दुल्हन और कन्याओं को भी आलता लगाया जाता है. आलता लगाना काफी शुभ माना जाता है और इसके बिना श्रृंगार भी अधूरा माना जाता है. इसी वजह से बहुत सारे राज्यों में शुभ कार्यों के दौरान महावर लगाना जरूरी माना जाता है.

कन्याओं को भी लगाया जाता है महावर
महावर को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. इसी वजह से नवजात बच्चियों और कुंवारी कन्याओं के पैरों में भी महावर लगाना शुभ होता है. कई जगहों पर बेटी के जन्म के बाद गृह प्रवेश के समय और नवरात्रि पूजन के दौरान कुंवारी कन्याओं के पैरों में महावर लगाकर, घर में इसकी छाप भी ली जाती है. जिससे घर सुख सम्पन्नता से भरपूर रहे.

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके नहीं लगाना चाहिए महावर
बहुत से महिलाएं शुभ कार्य में महावर लगाना तो जरूरी समझती हैं. लेकिन किसी भी दिशा में बैठकर इसको अप्लाई कर लेती हैं. जबकि मान्यता के अनुसार महावर को कभी भी दक्षिण दिशा में मुख करके नहीं लगाना चाहिए. इसलिए आलता लगाते समय दिशा का ध्यान जरूर रखें.

मंगलवार के दिन महावर नहीं लगाना चाहिए
पूजा-पाठ, त्योहार और शादी ब्याह के अवसर पर आलता लगाते समय दिन का भी ध्यान रखना बेहतर होता है. बता दें कि मंगलवार के दिन महावर नहीं लगाना चाहिए. इस दिन आलता लगाना शुभ नहीं माना जाता है.

इन राज्यों में बहुत है महावर लगाने का महत्त्व
वैसे तो शुभ कार्यों के दौरान महावर लगाने का रिवाज ज्यादातर जगहों पर है. लेकिन बंगाल, ओडिशा और बिहार में महावर लगाने की परंपरा बहुत ज्यादा है. यहां महावर लगाए बिना दुल्हन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है. इतना ही नहीं बंगाल, ओडिशा और बिहार में केवल पैरों में ही नहीं बल्कि दुल्हन के हाथों में भी महावर लगाया जाता है.

 

 

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