ज्ञात हो की अभी वन मंडल सुकमा में हुए करोड़ो के बोनस राशि गबन के मामले की कछुआ चाल जांच दल विचित्र विषयों के चलते निराधार को आधार बताकर जांच कमेटी जिस तरह से वापस हुई वो समझ से परे है ,तो वही गरीब आदिवासियों के हक की बोनस राशि डकारने वाले अधिकारी कर्मचारी व संलिप्त लोगों के हौसले बुलंद दिख रहे हैं ….पर यह क्षणिक है।
शायद ऐसे ही कार्यशक्ति मानो के लिए यह कहावत कही गई है की….. सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का
विभागीय कार्यो में शासन किसी संदर्भ में गरीब आदिवासियों के हित को देखते हुए नगद भुगतान की अनुमति दे रही है तो वही इस के दुरुपयोग की भी संभावनाएं शतप्रतिशत बढ़ गई है।
सुकमा वन मंडल में नई तकनीक के साथ बड़े स्तर के भ्रष्टाचार,फर्जीवाड़ा करने की बनाई जा रही रुप रेखा को अमलीजामा पहनाने के लिए अपने अधीनस्थों पर दबाव के साथ राशि बुक करने की चल रही जोरों से तैयारी पर तत्काल रोक लगाते हुए सुकमा वन मंडल के हर कार्यो के प्रमाणको व कार्य स्थलों की अन्य विभागों के तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराना अतिआवश्यक होगा।
विशेष सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार सुकमा वन मंडल में नगद भुगतान करने की अनुमति के आड पर ठूंठड्रेसिंग,कटाई,पुलिया,रपटा,मरम्मत,एवं अन्य कार्य को मार्च से पूर्व प्रमाणक बनाकर राशि बुक कराने के फरमान के साथ साथ उन संवेदनशील क्षेत्रों के कार्यो के लिए जहां मजदूर कार्य करने के लिए जाना नही चाहते या कार्य हो ही नही सकते वहां के लिए भी राशि बुक कराने की बात सूत्रों से ज्ञात हुई है ….
तहलका पत्रिका के द्वारा बहुत जल्द इस मामले का भी खुलासा किया जायेगा









