सोनम वांगचुक के समर्थन में देवभोग में एक दिवसीय भूख हड़ताल, युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, पेपर लीक पर कड़ी कार्रवाई की उठी मांग

Spread the love

गरियाबंद/देवभोग : लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में देवभोग ब्लॉक में एक दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल आयोजित की गई. इस दौरान विभिन्न समाज के युवा प्रतिनिधियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई तथा छात्रों के हितों की रक्षा की मांग उठाई.
कार्यक्रम में युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष टेकलाल प्रधान, भोले मांझी और हुकमत यादव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की जरुरत है. उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. इसलिए सरकार को इस विषय पर प्रभावी कदम उठाने चाहिए.
टेकलाल प्रधान ने कहा कि देश के युवाओं की आवाज़ को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता जरुरी है.
आदिवासी समाज के युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष भोले मांझी ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों का समाधान जल्द होना चाहिए और संवाद के माध्यम से सकारात्मक रास्ता निकाला जाना चाहिए.
सामाजिक कार्यकर्ता हुकमत यादव ने कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर छात्रों के हितों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने शिक्षा को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
वरिष्ठ नागरिक फिरोज खान ने भी शिक्षा को गरीब, किसान और मजदूर परिवारों के बच्चों के लिए अधिक सुलभ बनाने तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई की मांग की.
इस मौके पर पुलस्त नेताम, लोकेश सोनवानी और सूरज प्रधान सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा उपस्थित रहे और कार्यक्रम को अपना समर्थन दिया.

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 20वां दिन, बोले- 20 जुलाई तक हर हाल में रहना चाहता हूं जिंदा
नई दिल्ली : दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में पहुंच गई. वांगचुक ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक जिंदा रहना चाहते हैं. ताकि संसद तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च में शामिल हो सकें. उन्होंने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को होने वाले मार्च में बड़ी तादाद में पहुंचने की अपील की.
वांगचुक ने कहा कि वे लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद तक जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं. उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर कहा कि शरीर से वह कमजोर जरूर हो गए हैं. लेकिन मानसिक रूप से अब भी मजबूत हैं. उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि अगर 20 जुलाई का मार्च कामयाब नहीं हुआ तो वह “भूत बनकर वापस आएंगे.”
डॉक्टरों ने जताई गंभीर चिंता
लंबे समय से जारी अनशन की वजह से सोनम वांगचुक का वजन करीब 8.9 किलो तक कम हो गया है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि उनका उपवास अब नाजुक हालत में पहुंच चुका है और अगर हालात बिगड़े तो शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर फौरन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.
NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
वांगचुक NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी 20 जून से जंतर-मंतर पर इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रही है. वांगचुक इसी आंदोलन में शामिल हुए हैं. CJP का गठन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेरोजगार युवाओं पर की गई कथित टिप्पणी के बाद हुआ था.
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर भी आंदोलन
सोनम वांगचुक इससे पहले लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं. इस दौरान वह करीब 170 दिन तक जेल में रहे थे.
उन पर आरोप लगाया गया था कि 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा, जिसमें चार लोगों की मौत और करीब 90 लोग घायल हुए थे. उसमें उनकी भूमिका थी. सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था. इसके बाद 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेजा गया था.

Author