नई दिल्ली : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है. NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच 36 दिन बाद आखिरकार उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर मंतर पर जश्न का माहौल है. जंतर मंतर पर आंदोलन के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके ने मंच से इसका ऐलान किया. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया. दीपके ने जश्न के बीच लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमने कर दिखाया. लोग कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते थे. लेकिन हमने कर दिखाया.
दीपके ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. हमने कर दिखाया. यह क्या कहते थे…. क्या कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते. हम कहना चाहते हैं. कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए.”
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर ने कहा कि यह इस्तीफा सबूत है कि अगर जनता डरे नहीं और सरकार के सामने झुके नहीं. तो हम किसी का भी इस्तीफा ले सकते हैं. हमें डरने की जरूरत नहीं है. यह लोकतंत्र है. उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. लेकिन अब हमारी दो मांगे अभी भी बाकी हैं. नीट पेपर लीक के बाद जिन बच्चों ने आत्महत्या की थी उनके परिवारों के एक-एक करोड़ रुपए का हर्जाना दिया जाना चाहिए. और दूसरी मांग है कि 20 जुलाई को जिन पुलिसवालों ने गुंड़ों की तरह व्यवहार किया था. उनके खिलाफ ऐक्शन लिया जाना चाहिए. ताकि उन्हें एहसास हो की कॉकरोचों से पंगा नहीं लेना चाहिए.”
पेपर लीक विरोधी आंदोलन से जुड़े संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है. CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने कहा कि यह आंदोलन और छात्रों की एकजुटता की जीत है. उन्होंने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, “हमने कर दिखाया… लोग कहते थे कि सरकार कभी नहीं झुकेगी, लेकिन लोकतंत्र में हर कोई झुकता है, झुकाने वाला चाहिए.”
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस्तीफे की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कभी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा. इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.
CJP ने याद दिलाईं दो नई मांगें
अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने केंद्र सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें दोहराईं-
नीट पेपर लीक प्रकरण से जुड़े आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए.
प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
उन्होंने कहा, “हम कॉकरोच हैं, इतनी आसानी से नहीं जाएंगे. जब तक न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा.”
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर मौजूद पुलिस को भी धमकाया। दीपके ने कहा कि अगर एक मंत्री का इस्तीफा हुआ है तो तुम लोग क्या हो.
पहले भी किया था बड़ा दावा
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने नई मांग कर दी है. उनकी मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान तो गए अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बारी है. कन्हैया कुमार ने एक्स पर लिखा है, “अभी तो ली अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है. धर्मेंद्र गए, अब नरेंद्र की बारी है.” अपने पोस्ट में कन्हैया कुमार ने आगे लिखा है, “यह जवाबदेही” की शुरुआत है… जारी रहेगा…”
CJP की 3 डिमांड, सरकार की लिखित गारंटी और 5 पॉइंट चार्टर… आंदोलन इन शर्तों पर हुआ खत्म
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार के साथ सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया. सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और शिक्षा सुधारों पर पांच सूत्रीय चार्टर पर चर्चा का भरोसा दिया है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने समेत सरकार के साथ सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अपना आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया है. सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया. सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें थीं- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर व कानूनी मामलों को वापस लेना और नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना.
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ जितेंद्र सिंह और सीजेपी की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका इस वार्ता में शामिल थे. बैठक के बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी सद्भावना के आधार पर आंदोलन वापस लेने की घोषणा करती है. हमारी उम्मीद है कि सरकार तय समयसीमा के भीतर सभी सहमत शर्तों को लागू करेगी.’ कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन 6 जून को शुरू हुआ था. सौरव दास ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की मांग भी स्वीकार कर ली है. उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि भाजपा शासित और भाजपा सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में दर्ज मामलों पर भी लागू होगा.
उन्होंने कहा, ‘हमारी दूसरी मांग थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं. सरकार ने इस मांग को भी स्वीकार कर लिया है.’ सौरव दास के मुताबिक, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि एफआईआर जल्द वापस ली जाएंगी और उनकी प्रतियां भी संगठन को उपलब्ध कराई जाएंगी. उन्होंने बताया कि दिल्ली में करीब 15 से 20 एफआईआर दर्ज हुई थीं, जिनकी प्रतियां तीन से चार दिनों के भीतर मिल जाएंगी. सीजेपी ने सरकार को एक ड्राफ्ट सौंपते हुए एफआईआर वापस लेने और भविष्य में किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन मांगा था. सौरव दास ने कहा कि सरकार ने मंगलवार तक लिखित गारंटी देने का भरोसा दिया है. उन्होंने कहा कि आंदोलन वापस लेने का फैसला इन्हीं आश्वासनों के आधार पर लिया गया है.
शिक्षा सुधारों पर आगे की बात
वार्ता के दौरान सीजेपी ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर पांच सूत्रीय चार्टर भी सरकार को सौंपा. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार इस चार्टर का अध्ययन करेगी और सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल के साथ आगे भी चर्चा जारी रखेगी. उन्होंने कहा, ‘आपने शिक्षा सुधारों को लेकर जो चार्टर दिया है, उसका अध्ययन किया जाएगा और आपके प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत बातचीत भी होगी.’ सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा सुधारों के मुद्दे पर करीब चार सप्ताह बाद सरकार और सीजेपी के बीच अगली बैठक हो सकती है.
मुआवजे पर भी बन गई सहमति
सीजेपी ने नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी उठाई थी. सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने नियमों के तहत पीड़ित परिवारों को अधिकतम संभव सम्मानजनक मुआवजा देने पर सहमति जताई है. सौरव दास ने भी कहा कि सरकार ने नीट से जुड़े आत्महत्या के मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है. सरकार की ओर से प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने और बाकी मुद्दों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया. हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा तय समयसीमा में सभी वादे पूरे किए जाने की उम्मीद के साथ ही वे आंदोलन समाप्त करने का फैसला ले रहे हैं.











