रायपुर में असली सोने का सैंपल निकला पीतल का हार, खुदाई में मिला पुराना सोना बताकर 22.50 लाख की ठगी, 2 महिलाओं समेत मास्टरमाइंड गिरफ्तार

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रायपुर : खुदाई में पुराना सोना मिलने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का रायपुर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. गिरोह के मुख्य आरोपी शंभू राय समेत दो महिला आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया गया है. आरोपियों ने रायपुर के तीन अलग-अलग मामलों में 22.50 लाख रुपये की ठगी की थी. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 लाख रुपये नकद, पीतल के नकली जेवर, चांदी के सिक्के, मोबाइल फोन और चार फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं. जांच में गिरोह द्वारा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में करोड़ों रुपये की ठगी करने का खुलासा हुआ है.
मिली जानकारी के मुताबिक प्रार्थी महेश कानस्कर ने थाना न्यू राजेन्द्र नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 18 जनवरी 2026 को कलर्स मॉल के पास एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को दिहाड़ी मजदूर बताते हुए पुराने सिक्के एवं खुदाई में मिला सोने का हार होने की बात कही और बहन की शादी का हवाला देकर हार खरीदने का आग्रह किया। कुछ दिनों बाद आरोपी अपनी कथित मां के साथ प्रार्थी से मिला और हार की एक लड़ी से चार टुकड़े देकर उनकी जांच कराई। जो असली सोना पाए गए. इस पर दोनों ने आर्थिक मजबूरी बताकर पूरा हार बेचने का प्रस्ताव दिया.
5 फ़रवरी 2026 को पचपेड़ी नाका में मुलाकात के दौरान आरोपी और उसकी मां ने वही हार दिखाया। जिस पर भरोसा कर प्रार्थी ने 2,50,000 नगद दे दिए. बाद में सराफा बाजार में हार की जांच कराने पर वह पूरी तरह नकली और तांबे का निकला. इसके बाद आरोपी का मोबाइल बंद हो गया और काफी तलाश के बावजूद उसका कोई पता नहीं चला. इस तरह आरोपी एवं उसकी साथी महिला ने असली सोने का हार बताकर नकली हार देकर प्रार्थी से 2,50,000 रूपये की धोखाधड़ी की. प्रार्थी की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ थाना न्यू राजेन्द्र नगर में अपराध क्रमांक 92/26 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस का जुर्म दर्ज किया गया.
दुसरा मामला : प्रार्थी यश मोटवानी ने थाना तेलीबांधा में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 1 जून 2026 को उसकी मोबाइल एसेसरीज दुकान में एक व्यक्ति पुराना सिक्का दिखाकर चला गया और बाद में मोबाइल पर संपर्क कर खुदाई में मिला सोने का हार बेचने की बात कही. अगले दिन आरोपी अपने दो साथियों के साथ तेलीबांधा ओवरब्रिज के नीचे मिला और हार का एक टुकड़ा जांच के लिए दिया. जो ज्वेलर्स द्वारा असली सोना बताया गया. इस पर आरोपियों ने हार का सौदा 15 लाख में किया. जो बाद में 10 लाख में तय हुआ.
3 जून 2026 को जोरा ओवरब्रिज के पास आरोपियों ने हार दिखाया. प्रार्थी ने हार के दो टुकड़ों की जांच कराई. जिन्हें असली सोना बताए जाने पर आरोपियों को 10 लाख नगद देकर हार खरीद लिया. बाद में अन्य ज्वेलर्स से जांच कराने पर पूरा हार पीतल का निकला.
इस तरह मोबाईल फोन के धारक आरोपी गोपाल प्रजापति और उसके साथियों ने सोने का हार बताकर पीतल का हार बेचते हुए प्रार्थी से 10 लाख की धोखाधड़ी की. प्रार्थी की रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 249/26 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस का जुर्म दर्ज किया गया.
तीसरा मामला : प्रार्थी धवल बडोदरिया ने थाना डी.डी. नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके दोस्त नमन अग्रवाल के जरिए राजेश प्रजापति नामक व्यक्ति से परिचय हुआ. जिसने खुदाई में मिला करीब 2 किलो वजनी सोने का हार दिखाकर बेचने की बात कही. आरोपी द्वारा हार का एक टुकड़ा जांच के लिए दिया गया. जो असली सोना पाया गया. इसके बाद आरोपी और उसकी मां से सौदा तय हुआ.
23 जून 2026 को रायपुरा चौक के पास आरोपी और उसकी मां से मुलाकात हुई. जहां प्रार्थी ने 10 लाख नगद देकर सोने का हार खरीद लिया. बाद में हार की कई ज्वेलर्स से जांच कराने पर वह नकली निकला. इस तरह आरोपी राजेश प्रजापति एवं उसकी मां ने असली सोने का हार बताकर नकली हार बेचते हुए प्रार्थी से 10 लाख की धोखाधड़ी की. प्रार्थी की रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ थाना डी.डी.नगर में अपराध क्रमांक 390/26 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस का जुर्म दर्ज किया गया.
पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रॉबिन्सन गुरिया एवं पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल द्वारा संबंधित अधिकारियों, एण्टी क्राइम एण्ड साइबर यूनिट तथा संबंधित थाना प्रभारियों को अज्ञात आरोपियों की तत्काल पतासाजी कर शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एण्टी क्राइम एण्ड साइबर यूनिट एवं संबंधित थाना पुलिस की संयुक्त टीम का गठन किया गया. टीम द्वारा मामलों की फिर से बारीकी से जांच करते हुए सभी प्रार्थियों से डिटेल पूछताछ की गई और आरोपियों के हुलिए, गतिविधियों और वारदात के दौरान अपनाए गए तरीके के बारे में अहम जानकारी इकठ्ठा की गई. साथ ही घटनास्थलों एवं आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेजों का गहन परीक्षण किया गया.
जांच के दौरान तीनों घटनाओं में आरोपियों द्वारा अपनाया गया तरीका, बातचीत का तरीका, खुद को मजदूर बताना, खुदाई में सोने के जेवर मिलने की कहानी बताना, असली सोने का छोटा नमूना देकर भरोसा जीतना और बाद में पीतल के जेवर को सोने का बताकर बेचना सभी घटनाओं में एक जैसा पाया गया. इस आधार पर टीम ने निष्कर्ष निकाला कि तीनों घटनाओं को एक ही संगठित गिरोह द्वारा योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया है.
इसके बाद आरोपियों द्वारा प्रार्थियों से संपर्क करने में उपयोग किए गए मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया गया. साथ ही मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर विभिन्न माध्यमों से लगातार जानकारी एकत्रित की गई. तकनीकी सबूतों और सूचना के आधार पर आरोपियों की पहचान स्थापित करते हुए उनके महाराष्ट् के मुंबई शहर में होने की पुष्टि की गई.
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार पुलिस टीम को मुंबई रवाना किया गया. टीम द्वारा मुंबई पहुंचकर लगातार निगरानी एवं पतासाजी की गई. और मुख्य आरोपी शंभू राय सहित दो महिला आरोपियों को हिरासत में लिया गया. पूछताछ में मुख्य आरोपी शंभू राय ने बताया कि गीता गुजराती उसकी रिश्ते में चाची है. और शांति गुजराती उसके मोहल्ले की परिचित महिला है। दोनों महिलाओं को वह अलग-अलग मामलों में अपनी मां या अन्य रिश्तेदार बताकर पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए साथ ले जाता था और उनके जरिए धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम देता था.
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे इसी तरह का गिरोह बनाकर देश के कई राज्यों में घूम-घूमकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते रहे हैं। पूछताछ में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में एक दर्जन से ज्यादा धोखाधड़ी का जुर्म करना कबूल किया है. जिनमें करोड़ों रुपये की ठगी की गई है. अब तक किसी भी केस में आरोपियों गिरफ्तारी नहीं हुई थी और वे लगातार जगह बदलकर पुलिस से बचते रहे.
आरोपियों की गतिविधियां देश के कई राज्यों में पाई गई हैं. इस बारे में संबंधित राज्यों और जिलों की पुलिस से संपर्क स्थापित कर आरोपियों की जानकारी साझा की जा रही है. जिन-जिन राज्यों एवं जिलों में इनके द्वारा धोखाधड़ी की घटनाएं की गई हैं, वहां की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही एवं गिरफ्तारी की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाएगी.
मामले में शामिल अन्य आरोपियों के संबंध में भी आरोपियों से पूछताछ जारी है. जांच में जिन अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कार्यवाही करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा.
तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से नगदी रकम 9 लाख रूपये, चांदी का 12 नग सिक्का, पीतल के कई जेवर और घटनाओं में इस्तेमाल 4 नग मोबाईल फोन जुमला कीमती करीब 12 लाख रूपये जप्त करने के साथ ही आरोपी शंभू राय के चार अलग-अलग फर्जी आधार कार्ड भी जप्त किए गए हैं. जिसके बारे में जांच की जा रही है.
तरीका-ए-वारदात – आरोपी पहले ऐसे व्यक्तियों की तलाश करते थे जो आर्थिक रूप से सक्षम हों. इसके बाद खुद को दिहाड़ी मजदूर या खुदाई का काम करने वाला व्यक्ति बताकर उनसे संपर्क करते थे और यह कहानी बताते थे कि खुदाई के दौरान उन्हें पुराने समय के सोने के जेवर और सिक्के मिले हैं. भरोसा पैदा करने के लिए वे पीड़ित को सोने जैसा दिखने वाला भारी पीतल का जेवर दिखाते थे. अगर पीड़ित जेवर की जांच कराने की बात करता था. तो आरोपी उसी जेवर से पहले से तैयार रखा गया असली सोने का छोटा टुकड़ा (सैंपल) तोड़कर दे देते थे. जांच में वह सैंपल असली सोना निकलने पर पीड़ित पूरी तरह उनके झांसे में आ जाता था. इसके बाद आरोपी आर्थिक मजबूरी, बहन या बेटी की शादी या अन्य भावनात्मक कारण बताकर पूरा जेवर कम कीमत में बेचने का लालच देते थे. सौदा तय होने पर पीड़ित से लाखों रुपये नगद लेकर उसे सोने जैसा दिखने वाला पीतल का नकली जेवर थमा देते थे. बाद में जब पीड़ित पूरे जेवर की जांच कराता था. तब पता चलता था कि वह पूरी तरह पीतल का है और आरोपी मोबाइल बंद कर फरार हो चुके होते थे. इसी सुनियोजित तरीके से गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में लोगों को करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बनाता रहा.

गिरफ्तार आरोपी
शंभू राय पिता कन्हैया लाल राय उम्र 36 साल निवासी केनाल पटरी केशव नगर रेलवे फाटक थाना गोविंदपुर जिला कानपुर नगर (उ.प्र.)
गीता गुजराती पति स्व. दौलत राम उम्र लगभग 40 वर्ष, निवासी केनाल पटरी केशव नगर, रेलवे फाटक, थाना गोविंदपुर, जिला कानपुर नगर (उ.प्र.)
शांति गुजराती पति शंकर लाल गुजराती उम्र 35 साल निवासी केनाल पटरी केशव नगर, रेलवे फाटक, थाना गोविंदपुर, जिला कानपुर नगर (उ.प्र.)

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