बड़ा सवाल: आखिर कब नींद से जागेगा नगर पालिका परिषद बालोद?
📍 National Highway 930 पर सैकड़ों की तादाद में जमा हैं बेसहारा मवेशी! बारिश के इस मौसम में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा।
❓ Collector Saahiba के कड़े निर्देशों के बावजूद मैदानी स्तर पर पालन क्यों नहीं?
🚜 राज्य सरकार की ‘सुरभि गौधाम योजना’ से मिलेगा स्थायी समाधान, लेकिन बालोद में कब दिखेगा इसका असर?
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🔴 बालोद में हादसों का इंतजार कर रहा प्रशासन?
NH-930 पर मवेशियों का जमावड़ा और नगर पालिका की लचर व्यवस्था!
नगर पालिका परिषद बालोद को नींद से जागना होगा:
जिम्मेदारियाँ समझने का वक्त, लचर व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बालोद (विशेष संवाददाता)
शहर की सड़कों पर पसरा ढुलमुल रवैया और प्रशासनिक सुस्ती अब जनसुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुकी है। नगर पालिका परिषद बालोद की लचर कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिम्मेदार अमला किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, जबकि आम नागरिक रोजाना जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।

VVIP इलाकों और प्रमुख चौराहों पर मवेशियों का ‘कब्जा’:
तस्वीरें बयां कर रहीं व्यवस्था का सच
बालोद-झलमला से लेकर विभिन्न कॉलोनियों तक फैला नेशनल हाईवे 930 (NH-930) इन दिनों बेसहारा मवेशियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। हद तो तब हो जाती है जब शहर के अति-संवेदनशील और व्यस्ततम स्थलों—मुख्य चौक-चौराहों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, थाने यहाँ तक कि जिला मुखिया (कलेक्टर) के निवास के ठीक सामने भी सड़कों के बीचों-बीच सैकड़ों की संख्या में मवेशी डेरा जमाए बैठे नजर आते हैं।
सड़क पर पसरे इस जमावड़े की तस्वीरें नगर पालिका के दावों की पोल खोल रही हैं। विशेषकर बारिश के इस मौसम में गीली सड़कों और कम दृश्यता (विजिबिलिटी) के कारण बड़ी दुर्घटनाओं की पूरी संभावना बनी हुई है।
ताज्जुब की बात यह है कि इस सब के बावजूद सुध लेने वाला कोई नहीं है।


कलेक्टर साहिबा के निर्देशों को की गई अनदेखी:
प्रशासनिक स्तर पर निर्देशों का दौर जारी है, लेकिन धरातल पर क्रियान्वयन शून्य दिख रहा है।
कलेक्टर साहिबा द्वारा पूर्व में तथा समय-समय पर पत्र जारी कर व मौखिक रूप से शहर एवं झलमला से कॉलेज मार्ग तक मवेशियों को हटाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

बड़ा सवाल:
जब जिला प्रमुख के निवास के सामने ही मवेशी बैठे हैं और उनके निर्देशों का भी मैदानी अमला पालन नहीं कर रहा, तो नगर पालिका की मंशा पर सवाल उठना लाजमी है।
पूर्व में नगर पालिका अधिकारियों द्वारा अलग-अलग विशेष टीमें गठित कर सड़कों से मवेशियों को हटाने का कार्य नियमित रूप से किया जाता था, जिसके सकारात्मक परिणाम दुर्घटनाओं में आई कमी के रूप में दिखे थे। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।
समाधान सामने है: ‘सुरभि गौधाम योजना’ का त्वरित क्रियान्वयन जरूरी
जहाँ एक तरफ सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा जानलेवा बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी ‘सुरभि गौधाम योजना’ इस समस्या का स्थायी समाधान बनकर उभरी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 14 मार्च 2026 को बिलासपुर के तखतपुर (लाखासर) से इस योजना का शुभारंभ किया गया, जिसका सीधा प्रसारण बालोद NIC कक्ष में भी देखा गया था।
प्रदेश के हर विकासखंड में 10-10 (कुल 1,460) गौधाम बनाने का लक्ष्य है, जहाँ प्रत्येक गौधाम में लगभग 200 निराश्रित गौवंशों को आश्रय मिलेगा।
बालोद जिले में योजना का खाका और लाभ:
विकासखंडवार लक्ष्य: बालोद, गुरूर, गुंडरदेही,डौण्डीलोहारा और डौण्डी विकासखंडों में चरणबद्ध तरीके से प्रति ब्लॉक 10-10 गौधाम बनाए जाने हैं।
संचालन व्यवस्था:
सरकारी भूमि पर फेंसिंग, शेड, बिजली-पानी की व्यवस्था कर इन्हें पंजीकृत समितियों, NGOs या स्वयं सहायता समूहों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।
वित्तीय अनुदान व मानदेय:
भरण-पोषण के लिए पहले साल ₹10 से लेकर चौथे साल तक ₹35 प्रति पशु प्रतिदिन अनुदान दिया जाएगा। चरवाहों को ₹10,916 और गौ-सेवकों को ₹13,126 का मासिक मानदेय तय है।
आर्थिक केंद्र:
यहाँ गोबर-गोमूत्र से खाद व जैविक उत्पाद बनाकर युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार मिलेगा तथा पशुपालकों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

जनता की मांग:
कागजी बैठकों से इतर धरातल पर दिखे कार्रवाई
सुरभि गौधाम योजना बालोद के लिए वरदान साबित हो सकती है, लेकिन इसके पूर्ण रूप से शुरू होने तक नगर पालिका हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकती।
बालोद की जनता मांग करती है कि जब तक गौधाम पूरी तरह सक्रिय नहीं होते, तब तक नगर पालिका परिषद के जिमेदार अपनी नींद त्यागे और तत्काल प्रभाव से विशेष टीमों का गठन कर NH-930, अस्पताल, स्कूल और कलेक्ट्रेट मार्ग से मवेशियों को हटाने का अभियान शुरू करे।












