फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे सरपंच बनने का आरोप, कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार, कलेक्टर ने कहा- आरोप सिद्ध होने पर नहीं बख्शा जाएगा दोषी

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मुंगेली : मुंगेली जिले के ग्राम पंचायत अमोरा में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सरपंच पद को लेकर विवाद गहरा गया है. वर्तमान सरपंच पर कथित तौर पर फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने और निर्वाचित होने का गंभीर आरोप लगाया गया है. मामले को लेकर शिकायतकर्ता विजय खांडेकर ने मुंगेली कलेक्टर के सामने शिकायत पेश कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
शिकायत सामने आने के बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया, जाति प्रमाण पत्र की वैधता और संबंधित दस्तावेजों की जांच को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी मामला गंभीरता से लिया जा रहा है. बताया जा रहा है कि जिला स्तरीय जांच के बाद मामले को अब राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय छानबीन समिति के पास भेज दिया गया है.
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता विजय खांडेकर के मुताबिक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान ग्राम पंचायत अमोरा का सरपंच पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित था. आरोप है कि सरपंच पद के प्रत्याशी याकूब मसीह ने अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित कथित प्रमाण पत्र पेश करते हुए चुनाव लड़ा और बाद में निर्वाचित हो गए.
शिकायतकर्ता का दावा है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों के सामने इस बारे में आपत्ति और शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के बाद आवश्यक दस्तावेज और सबूत पेश करने के निर्देश भी दिए गए थे. हालांकि शिकायतकर्ता के मुताबिक दस्तावेज उपलब्ध कराने में हुई तकनीकी देरी के बीच चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ गई और संबंधित प्रत्याशी सरपंच निर्वाचित हो गए.
चुनाव के बाद भी जारी रही शिकायत की प्रक्रिया
शिकायतकर्ता का कहना है कि चुनाव संपन्न होने के बाद उन्होंने मामले को लेकर संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने कई बार शिकायतें कीं. उनका आरोप है कि लंबे समय तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की वजह से उन्हें लगातार कई कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े.
इसके बाद उन्होंने एक बार फिर मुंगेली कलेक्टर के सामने ज्ञापन सौंपकर कथित जाति प्रमाण पत्र की वैधता की जांच कराने और अगर प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की.
जिला स्तरीय जांच पूरी, राज्य समिति को भेजा गया मामला
मामले को लेकर आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी शिव बांधे ने बताया कि शिकायतकर्ता विजय खांडेकर की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है. उनके मुताबिक शिकायत के आधार पर जिला स्तरीय जांच समिति द्वारा प्राथमिक जांच पूरी कर ली गई है.
अधिकारी ने बताया कि जाति संबंधी दावे की प्रकृति को देखते हुए मामले में विस्तृत और तकनीकी जांच की जरुरत है. इसी वजह से जिला स्तरीय समिति ने अपनी संस्तुति के साथ मामले को राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय छानबीन समिति को भेज दिया है. अब मामले में अंतिम और वैधानिक निर्णय राज्य स्तरीय समिति की जांच और उसके निष्कर्ष के आधार पर होगा.
कलेक्टर ने कहा- आरोप सिद्ध होने पर नहीं बख्शा जाएगा दोषी
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंगेली कलेक्टर कुन्दन कुमार ने भी स्पष्ट रुख अपनाया है. कलेक्टर के मुताबिक मामला प्रशासन के संज्ञान में है और इसकी विधिवत एवं निष्पक्ष जांच कराई जा रही है.
उन्होंने कहा कि अगर जांच के दौरान आरोप सही पाए जाते हैं और संबंधित जाति प्रमाण पत्र फर्जी साबित होता है. तो दोषी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन की तरफ से यह भी साफ किया गया है कि जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी.
सरपंच का पक्ष जानने का प्रयास, फोन पर नहीं मिली प्रतिक्रिया
वहीं, मामले में मिडिया ने ग्राम पंचायत अमोरा के सरपंच याकुब कुमार टंडन का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. हालांकि, सरपंच की तरफ से इस पूरे मामले को लेकर कोई विस्तृत लिखित या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में उनका पक्ष सामने आने के बाद उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जा सकता है.
अब राज्य स्तरीय समिति के फैसले पर टिकी नजरें
ग्राम पंचायत अमोरा से जुड़े इस मामले में अब सभी की नजरें राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच पर टिकी हैं। समिति द्वारा जाति प्रमाण पत्र और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है.
अगर जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाता है. तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ निर्वाचन एवं अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है. वहीं अगर प्रमाण पत्र वैध पाया जाता है. तो शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्थिति भी साफ हो जाएगी. फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और आल्हरी फैसला राज्य स्तरीय समिति की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा.

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