भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने वाले विद्यार्थियों और युवाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने संवैधानिक दायरे में रहकर अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए जो जागरूकता दिखाई है. वह लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है. उन्होंने आशा व्यक्त की कि सरकार छात्रों की जायज चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी.
तेजराम विद्रोही ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा जारी सार्वजनिक पत्र और त्यागपत्र की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता के विश्वास की रक्षा करना है. अगर शिक्षा व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं के कारण करोड़ों विद्यार्थियों और उनके परिवारों का विश्वास डगमगाता है. तो केवल खेद व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है. बल्कि दोषियों के खिलाफ कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है.
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य और उनके वर्षों के परिश्रम से जुड़ी होती है. इसलिए परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना अत्यंत आवश्यक है. किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार युवाओं के सपनों के साथ अन्याय है. अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए त्यागपत्र दिया है. तो यह लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान माना जा सकता है. लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि परीक्षा में हुई अनियमितताओं के वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए. ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. देश के किसान परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए कठिन परिश्रम करते हैं. ऐसे में परीक्षा प्रणाली पर उठने वाले सवाल किसानों और ग्रामीण परिवारों की उम्मीदों पर भी आघात करते हैं. सरकार को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए. जिसमें किसी भी विद्यार्थी को परीक्षा माफिया, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक लापरवाही का शिकार न होना पड़े.
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, तकनीकी सुरक्षा मजबूत करने, समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने तथा दोषियों को कठोर दंड देने की स्थायी व्यवस्था लागू की जाए. साथ ही छात्रों के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए.
2026-07-25











