डोंगरगढ़ : दुनिया में कई तरह के विरोधाभास देखने को मिलते हैं. लेकिन हमारी व्यवस्था का एक नया विरोधाभास सामने आया है ”सरकार ही पिलाएगी और सरकार ही पकड़ेगी!”
सोचिए, आपने सरकार की अधिकृत दुकान से, सरकार द्वारा तय दरों पर, सरकार के ही बनाए ‘अहाते’ में बैठकर कानूनी रूप से दो घूंट ज़िंदगी के डाले.. अब जब आप एक अनुशासित नागरिक की तरह घर लौटने लगे. तो रास्ते में पुलिस अंकल मुस्कुराते हुए प्रकट होते हैं और कहते हैं—”अरे वाह! सार्वजनिक स्थान पर शराब पीकर घूम रहे हो. चलो चालान कटाओ!” अब आप माथा न पकड़ें तो क्या करें? यही सवाल आजकल डोंगरगढ़ के गलियारों में गूंज रहा है.
दवाई लेने निकले थे, ‘कार्रवाई’ लेकर लौटे!
मामला 6 अगस्त का है. एक नक्सल पीड़ित परिवार का नौजवान अपनी माताजी के लिए मेडिकल स्टोर से दवाई खरीदने निकला था. घर लौटते वक्त सड़क किनारे अपनी बाइक रोककर फोन पर किसी से बात करने लगा. अब रास्ते में खड़े होकर फोन मिलाना क्या इतना बड़ा जुर्म हो गया कि पुलिस की नज़र पड़ गई? पुलिस आई और सीधा आरोप जड़ दिया—“तुम सार्वजनिक स्थान पर शराब पी रहे थे!”
युवक हक्का-बक्का! न कोई बोतल, न डिस्पोजल गिलास, न चखने का पैकेट! पर साहिब, जब पुलिस का मूड बन जाए तो कागज़ी कार्रवाई के लिए सबूतों की ज़रूरत किसे है? जबरन दस्तखत करवा लिए गए कि “भविष्य में सार्वजनिक स्थान पर दारू नहीं पियूँगा!” अब पीड़ित का कहना है कि जब मैंने सड़क पर पी ही नहीं, तो मुचलका किस बात का भाई?
“अगर पिलाना राजधर्म है, तो नियम भी साफ करो!”
इस अनोखी कार्रवाई से भड़के नक्सल पीड़ित परिवारों ने अब सीधे राजनांदगांव एसपी साहब का दरवाजा खटखटाया है. उनका सीधा और वाजिब सवाल है ”जब सरकार खुद काउंटर खोलकर दारू बेच रही है. बार और अहाते बनवा रही है. तो वहां से पीकर निकलने वाला बंदा आसमान से उड़कर तो घर जाएगा नहीं? रास्ते में चलते ही अगर ‘सार्वजनिक स्थान पर शराब पीना’ मान लिया जाएगा. तो फिर ठेके पर ‘होम डिलीवरी’ का बोर्ड भी लगा ही दो!”*
पीड़ितों की मांग बहुत सरल है मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह तय किया जाए कि ‘पीकर रास्ते से गुजरना’ और ‘सड़क पर बैठकर महफिल जमाना’ दोनों में थोड़ा अंतर होता है!
10 अगस्त को ‘डोंगरगढ़ से रायपुर’ तक पैदल मार्च!
अगर प्रशासन ने इस अनोखे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की, तो पीड़ित परिवारों ने आर-पार के मूड का ऐलान कर दिया है. 10 अगस्त को सुबह 10 बजे डोंगरगढ़ थाने से विधानसभा अध्यक्ष के रायपुर स्थित निवास तक एक शांतिपूर्ण ‘पदयात्रा’ निकाली जाएगी. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि इस पैदल यात्रा से व्यवस्था की नींद खुलती है या फिर इस बार ‘पैदल चलने’ पर भी कोई नया नियम लागू हो जाता है.













