क्या है पुंसवन संस्कार, क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण, 16 संस्कारों में आता है दूसरे नंबर पर

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सनातन धर्म में 16 संस्कारों का विशेष महत्व बताया गया है. प्रत्येक संस्कार मनुष्य के जन्म से मृत्यु तक किए जाते हैं. न्यूज़18 हिंदी द्वारा चलाई जा रही 16 संस्कारों की सीरीज में पिछले आर्टिकल में हमने बात की थी गर्भाधान संस्कार के बारे में जो 16 संस्कारों में सबसे पहले नंबर पर आता है. इस सीरीज को आगे बढ़ाते हुए आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे दूसरे संस्कार यानी पुंसवन संस्कार के बारे में. ये कब होता है, क्यों होता है और इसका क्या महत्व है. जिसके बारे में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

क्या है पुंसवन संस्कार?
16 संस्कारों में दूसरे नंबर पर आने वाला पुंसवन संस्कार का गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है. यह संस्कार महिला द्वारा गर्भ धारण करने के 3 महीने बाद किया जाता है. इस समय गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क का विकास होना शुरू हो जाता है. ये वह समय होता है जब गर्भ में पल रहे शिशु के संस्कारों की नींव रखी जाती है. इस दौरान उन्हें कुछ संस्कार सिखाए जाते हैं. मान्यताओं के अनुसार पुंसवन संस्कार करने से संतान हष्ट पुष्ट पैदा होती है साथ ही इस कर्म से गर्भ में शिशु की रक्षा भी होती है.

इस दौरान क्या करें गर्भवती महिलाएं
पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार इस दौरान गर्भवती महिलाओं को अच्छी किताबें पढ़ना चाहिए, खुशनुमा वातावरण में रहना चाहिए, इस दौरान खान-पान अच्छा रखें. मन में अच्छे विचार लाना चाहिए. पति पत्नी के बीच अच्छे रिश्ते होना चाहिए जिससे आपको उत्तम संतान की प्राप्ति हो.

किस दिन करें पुंसवन संस्कार
धार्मिक ग्रंथों के जानकार के अनुसार पुंसवन संस्कार के लिए सबसे अच्छे दिन सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार माने गए हैं. इस दिन पूजा की थाली में चावल, रोली, फूल, तुलसी, गंगाजल और खीर शामिल करें. इसके बाद भगवान को भोग लगाएं. गर्भवती महिला के हाथ में कलावा बांधकर घर के सभी सदस्य एक साथ बैठकर भगवान को लगाए गए भोग का सेवन करें यही संस्कार होता है.

 

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