हर मनोकामना होगी पूरी, इस विधि से जलाएं अलग-अलग आटे के दीपक, जानें इसका महत्व और फायदे

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सनातन धर्म में कोई भी पूजा-पाठ बिना दीप प्रज्ज्वलित के पूरा नहीं माना जाता. दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है. मान्यता है कि दीपक जलाने से उस जगह का वातावरण शुद्ध हो जाता है. पूजा-पाठ और मनोकामना पूर्ति के लिए मिट्टी और आटे के दीपक जलाने की बारे में वर्णन मिलता है. दोनों तरह के दीपक जलाने का अलग-अलग महत्व है. आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से आटे के दीपक जलाने के महत्व और नियम के बारे में.

गेहूं के आटे का दीपक- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि आप किसी तरह के विवाद में फंस गए हैं और उससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो इसके लिए आप गेहूं के आटे का दीपक जलाएं. ऐसा करने से आपको उस विवाद से जल्दी छुटकारा मिलेगा.

मूंग के आटे का दीपक- ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि यदि आप घर में मूंग के आटे का दिया जलाते हैं तो इससे आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. इससे घर में शांति आती है. दरिद्रता दूर होती है, घर के सदस्यों को अनेक कार्यों में सफलता प्राप्त होती है.

उड़द के आटे का दीपक- वैदिक ज्योतिष में बताया गया है कि यदि आप अपने शत्रु पर विजय प्राप्त करना चाहते हैं और उसे पछाड़कर आगे निकलना चाहते हैं तो इसके लिए उड़द के आटे के दीपक जलाना चाहिए. ऐसा करने से आपके शत्रु आपके आसपास भी नजर नहीं आएंगे.

आटे के दीपक जलाने के फायदे- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रत्येक देवी-देवताओं को रोशनी अति प्रिय है, जिसकी वजह से उनके समक्ष दीपक जलाए जाते हैं. वहीं ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि पूजा-पाठ में अनुष्ठान के दौरान दीपक जलाने से पूरा वातावरण शुद्ध होता है. घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है. नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है. मनुष्य के जीवन में आने वाली भिन्न-भिन्न प्रकार की समस्याओं से छुटकारा मिलता है, घर का माहौल खुशनुमा बना रहता है.

दीपक जलाने के नियम- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि आपने कोई मन्नत मानी है और वह पूरी हो जाती है तो उसके लिए घटते या बढ़ते क्रम में दीपक जलाना चाहिए. इसमें 11, 21 और 31 दिन का महत्व होता है. इन दीपक को आप एक से शुरू करके 11 तक ले जा सकते हैं. वहीं मनोकामना पूरी होने के बाद इन्हें घटते क्रम में जैसे पहले दिन 11 दीपक, दूसरे दिन 10 दीपक, तीसरे दिन 9 दीपक करते हुए एक दीपक तक लाना चाहिए.

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