हिंदू धर्म में भगवान शिव के असंख्य भक्त हैं, जो भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. अक्सर आपने देखा होगा की भोलेनाथ अपने साथ हमेशा जटाओं में गंगा, माथे पर चंद्रमा, गले में नाग, हाथ में डमरू और त्रिशूल लिए रहते हैं. क्या है इन 5 चीजों का महत्व और क्यों हमेशा अपने साथ धारण किए होते हैं? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
चंद्रमा का महत्व- धार्मिक पौराणिक कहानियों के अनुसार, राजा दक्ष ने चंद्रमा को श्राप दिया था, जिससे छुटकारा पाने के लिए चंद्रमा ने भगवान शिव की कड़ी तपस्या की और उन्हें प्रसन्न कर ना सिर्फ जीवनदान पाया, बल्कि उनके शीश पर धारण होने का सौभाग्य प्राप्त किया. 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना खुद चंद्र देव ने की थी. ये भी मान्यता है कि चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है, जिसके कारण भगवान शिव ने मन को नियंत्रित करने के लिए चंद्रमा को माथे पर धारण किया है.
गले में नाग का महत्व- धार्मिक पुराणों के अनुसार, भोलेनाथ के गले में जो नाग है, वह नागलोक के राजा वासुकी हैं. प्रचलित मान्यता है कि राजा वासुकी महादेव के परम भक्त थे. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव शंकर ने उन्हें आभूषण के रूप में हमेशा अपने गले में धारण करने का वरदान दिया था. यही कारण है कि पूरा नागलोक भगवान शिव का उपासक माना जाता है.
त्रिशूल का महत्व- धार्मिक ग्रंथ शिव पुराण में बताया गया है कि भगवान शिव को हर एक अस्त्र चलाने में महारत हासिल है परंतु उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय त्रिशूल है. त्रिशूल रज, तय और सत इन तीनों का प्रतीक माना जाता है. इन्हीं से मिलकर त्रिशूल का निर्माण हुआ है. कहते हैं महादेव के त्रिशूल के सामने सृष्टि की किसी भी शक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है. ये दैविक और भौतिक विनाश का भी कारक माना जाता है.
डमरू का महत्व- धार्मिक पौराणिक कहानियों के अनुसार, जिस समय सृष्टि की रचना हुई, उस समय विद्या और संगीत की देवी सरस्वती अवतरित तो हुईं परंतु उनकी वाणी से जो ध्वनि उत्पन्न हुई वह बिना सुर और संगीत की थी. उस समय भगवान शिव ने 14 बार डमरू बजाया और अपने तांडव नृत्य के जरिए संगीत की उत्पत्ति की. इसलिए भगवान शिव को संगीत का जनक कहा जाता है. यदि किसी व्यक्ति के घर में डमरू होता है तो यह शुभ होता है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है.
जटाओं में गंगा का महत्व- भोलेनाथ की जटाओं में आपने देवी गंगा को देखा होगा. पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब गंगा नदी पृथ्वी पर अवतरित हुईं थीं तो वे बेहद तीव्र और उग्र थीं. जो सृष्टि के लिए संहारक हो सकती थीं. उन्हें नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण कर लिया.











