बुधवार का दिन गौरी पुत्र गणेश को समर्पित किया गया है. अक्सर आपने भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का उपयोग देखा होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार बप्पा को दूर्वा अति प्रिय है. कहते है यदि भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित की जाए तो वे प्रसन्न होकर अपने भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान गणेश को दूर्वा क्यों अर्पित की जाती है? आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.
दूर्वा चढ़ाने की पौराणिक कथापौरराणिक कथा के अनुसार प्रचीन काल में अनलासुर नाम का एक राक्षस था. जिसकी वजह से स्वर्ग और धरती के सभी लोग परेशान थे. वह राक्षस इतना खतरनाक था कि ऋषि-मुनियों सहित आम लोगों को भी जिंदा निगल जाता था. इससे परेशान होकर देवराज इंद्र के साथ सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे. भगवान शिव से सभी ने प्रार्थना की कि वे इस असुर का वध करें. शिवजी ने सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रार्थना सुनकर उन्हें बताया कि अनलासुर का अंत केवल गणपति ही कर सकते हैं.
पेट की जलन दूर करने के लिए अर्पित की दूर्वाजब भगवान गणेश ने अनलासुर को निगला तो उनके पेट में बहुत जलन होने लगी. इससे बचने के लिए कई प्रकार के उपाय किए गए, परंतु भगवान गणेश के पेट की जलन शांत नहीं हो रही थी. तब कश्यप ऋषि को एक उपाय सूझा. उन्होंने दूर्वा की 21 गांठ बनाई और भगवान गणेश को खाने के लिए दी. जब बप्पा ने दूर्वा का सेवन किया तो उनके पेट की जलन शांत हो गई. तभी से भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित की जाने लगी.
पूजा में दूर्वा का महत्वदूर्वा को दूब, अमृता, अनंता, महौषधि कई नामों से भी जाना जाता है. सनातन धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य बिना हल्दी और दुर्वा के पूरा नहीं माना जाता.
दूर्वा चढ़ाने के नियमभगवान गणेश को एक खास तरीके से दूर्वा चढ़ाई जाती है.सबसे पहले दूर्वा का जोड़ा बनाया जाता है.फिर उसे भगवान गणेश पर चढ़ाया जाता है.22 दूर्वा को एक साथ जोड़ने पर दूर्वा के 11 जोड़े तैयार हो जाते हैं.इन 11 जोड़ों को भगवान गणेश पर चढ़ाना चाहिए.
कहां से तोड़ें दूर्वा?दुर्वा किसी मंदिर के बगीचे या साफ जगह पर उगी हुई ही लेना चाहिए.जहां गंदा पानी बहता हो, वहां की दूर्वा भूलकर भी न लें.दूर्वा चढ़ाने से पहले साफ पानी से इसे धो लेना चाहिए.











