छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला मामला : कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य विजय दर्डा को चार साल की सजा

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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में कोल ब्लाक आवंटन से जुड़े मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य विजय दर्डा को बड़ा झटका दिया है। मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने आज बुधवार को विजय दर्डा को चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने आइपीसी की धारा 120बी, 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अन्य धाराओं के तहत उन्हें दोषी ठहराया है। वहीं, अन्य दोषियों को तीन वर्ष की सजा सुनाई है।

अदालत ने इसके साथ ही यवतमोल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मनोज कुमार जयसवाल और दो अधिकारी केएस क्रोफा व केसी सामरिया को भी तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष न्यायाधीश संजय बंसल ने गुरुवार (13 जुलाई) को सातों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करना) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया. जेएलडी यवतमाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मनोज कुमार जायसवाल और दो अधिकारी केएस क्रोफा और केसी सामरिया उन अन्य लोगों में शामिल हैं, जिन्हें दोषी ठहराया गया है. सातों को आईपीसी की धारा 409 (लोक सेवकों द्वारा आपराधिक विश्वासघात) के तहत बरी कर दिया गया. इस मामले में सजा पर 18 जुलाई को सुनवाई होगी. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कहा कि कोयला आवंटन घोटाला मामले में 13 लोगों को दोषी ठहराया गया है, जिसने 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार को हिलाकर रख दिया था. 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने बिजली, स्टील और सीमेंट कंपनियों को साल 1993 से 200 से अधिक कोयला ब्लॉकों के आवंटन को अवैध घोषित कर दिया था. 2012 में अपनी रिपोर्ट में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने कहा था कि कम कीमत पर बिक्री से सरकारी खजाने को नुकसान होता है. इस घोटाले को ‘कोलगेट’ करार दिया गया था. छत्तीसगढ़ में कोयला ब्लॉक आवंटन से संबंधित मामले में अपनी एफआईआर में सीबीआई ने कहा कि जेएलडी यवतमाल ने 1999-2005 में अपने समूह की कंपनियों को चार कोयला ब्लॉकों के पिछले आवंटन को गलत तरीके से छिपाया था. बाद में एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई, जिसमें कहा गया कि कोयला मंत्रालय ने कंपनी को कोई अनुचित लाभ नहीं दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह साबित करने के लिए कुछ भी ठोस सामने नहीं आया कि कोयला मंत्रालय के अधिकारी और जेएलडी यवतमाल एनर्जी के निदेशक धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश में शामिल थे. हालांकि ट्रायल कोर्ट ने नवंबर 2014 में क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और सीबीआई को मामले में आगे की जांच करने का निर्देश दिया.

इसमें कहा गया है कि विजय दर्डा ने मनमोहन सिंह को लिखे पत्रों में तथ्यों को ‘गलत तरीके से प्रस्तुत’ किया, जिनके पास उस समय कोयला विभाग था. अदालत ने कहा कि लोकमत समूह के अध्यक्ष विजय दर्डा ने छत्तीसगढ़ में फतेहपुर (पूर्व) कोयला ब्लॉक जेएलडी यवतमाल एनर्जी को आवंटित करने के लिए ऐसा किया था. इसमें कहा गया है कि निजी पार्टियों ने प्रथमदृष्टया लोक सेवकों के साथ रची गई साजिश को आगे बढ़ाते हुए धोखाधड़ी का अपराध किया है. 35वीं स्क्रीनिंग कमेटी ने जेएलडी यवतमाल एनर्जी को फतेहपुर (पूर्व) कोयला ब्लॉक आवंटित किया था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2012 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने 2004 से 2009 के बीच गैर-पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और निजी कंपनियों को 194 कोयला ब्लॉकों के कथित अकुशल आवंटन के लिए सरकार की आलोचना की थी. कैग ने शुरू में सरकारी खजाने को 10.6 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया था, लेकिन संसद में पेश की गई, उसकी अंतिम रिपोर्ट में यह आंकड़ा 1.86 लाख करोड़ रुपये बताया गया.

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