दुर्ग/भिलाई-रायपुर : महान लोक गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का आइकॉनिक तंबूरा और उनसे जुड़ी अन्य यादें अब रायपुर स्थित राज्य संग्रहालय की शोभा नहीं बढ़ाएंगी. तीजन बाई के परिजनों ने उनकी ऐतिहासिक धरोहरों- जिनमें उनका प्रसिद्ध तंबूरा, साड़ियां और पारंपरिक गहने शामिल हैं उसको संस्कृति विभाग के संग्रहालय में सौंपने से साफ इंकार कर दिया है.
छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग की एक विशेष टीम तीजन बाई का तंबूरा और उनकी अन्य व्यक्तिगत सामग्रियां संग्रहालय में संरक्षित करने के मकसद से उनके भिलाई स्थित निवास पहुंची थी. लेकिन परिजनों के असहयोग और इंकार के बाद टीम को खाली हाथ ही लौटना पड़ा.
गनियारी स्थित ‘कौशल्या निवास’ बनेगा निजी संग्रहालय
परिजनों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि वे तीजन बाई की जिंदगी भर की साधना और यादों को किसी सरकारी संग्रहालय में भेजने के बजाय उनके गनियारी स्थित ‘कौशल्या निवास’ में ही सहेज कर रखेंगे. परिजनों का कहना है कि वे इस घर को ही एक स्मारक व निजी संग्रहालय का रूप देंगे. जहां पंडवानी गायन से जुड़ी उनकी साड़ियाँ, गहने, तंबूरा और उन्हें मिले सम्मान/पुरस्कार प्रदर्शित किए जाएँगे.
परिजनों का पक्ष
तीजन बाई का तंबूरा सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि उनकी पंडवानी साधना की आत्मा है. हमारी भावनाएँ इस घर से जुड़ी हैं. हम चाहते हैं कि देश-दुनिया से उनके प्रशंसक और शोधार्थी सीधे गनियारी आएँ और उसी माटी में उनकी धरोहर को देखें जहाँ उन्होंने अपनी कला को जीया है.
संस्कृति विभाग की मंशा पर परिजनों की चिंता
संस्कृति विभाग का तर्क था कि रायपुर संग्रहालय में रखने से तीजन बाई की धरोहरों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान और वैज्ञानिक संरक्षण मिल सकेगा. हालाँकि, परिजनों को अंदेशा है कि बड़े संग्रहालयों में अक्सर ऐसी महान हस्तियों की व्यक्तिगत वस्तुएँ रखरखाव के अभाव या अन्य कलाकृतियों की भीड़ में खो जाती हैं.
पंडवानी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने वाली तीजन बाई का तंबूरा भारतीय लोक संगीत इतिहास की एक अनमोल धरोहर है. परिजनों के इस फैसले के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गनियारी के ‘कौशल्या निवास’ को वे किस तरह एक भव्य और सुव्यवस्थित संग्रहालय का रूप देते हैं.
2026-07-25











