कबीरधाम : छत्तीसगढ़ के गुरुकुल आवासीय विद्यालय से एक बेहद डरावना और दिल को झकरोर देने वाली घटना सामने आई है. विद्यालय में पढ़ रही नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म होते रहा. गर्भवती हो गई. इसके बाद उसे जबरिया टीसी देकर स्कूल से बाहर कर दिया. दुष्कर्म की पीड़ा झेलते-झेलते एक बच्चे की मां बन गई है. घटना से नाराज छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने SIT जांच, DNA टेस्ट और दोषियों पर POCSO के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की
कबीरधाम जिला का मामला बेहद संगीन और दिल को दहला देने वाला है, एक आदिवासी बालिका को उसके माता पिता ने इस भरोसे के साथ ही आवासीय विद्यालय में छोड़ा था. वहां वह सुरक्षित रहेगी और अपना भविष्य संवारेगी. भविष्य संवारने का जिन लोगों पर जिम्मा था. उसे ऐसा दर्द दिया कि उसे नाबालिग मासूम सहन नहीं कर पा रही है. पढ़ाई के बजाय उसके शरीर को रौंदा गया. दुष्कर्म की घटनाएं हुई और दुष्परिणाम ये आज वह एक बच्चे की मां बन गई है.
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद (शाखा कबीरधाम) के जिलाध्यक्ष कामू बैगा ने कबीरधाम के एक प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालय गुरुकुल में शासकीय संरक्षण में अध्ययनरत “गोंड समाज” ( जनजाति) की एक नाबालिग छात्रा के साथ हुए संस्थागत लैंगिक शोषण,और 8 माह की गर्भावस्था को दबाने की साज़िश और मामले को छुपाने की कोशिशों पर कड़ा विरोध जताया है.
परिषद द्वारा इस पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक, जिला कबीरधाम को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, नवजात शिशु एवं संदिग्धों के DNA परीक्षण, संस्था की मान्यता रद्द करने तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है.
पीड़िता राज्य सरकार की ‘जवाहर उत्कर्ष योजना’ के तहत कबीरधाम स्थित गुरुकुल आवासीय विद्यालय में कक्षा 9वीं की छात्रा थी. योजना के तहत बच्ची की पूर्ण सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की थी. शैक्षणिक सत्र के दौरान जून 2025 से जनवरी 2026 तक छात्रा हॉस्टल में ही रही. जनवरी 2026 में उसे अचानक TC देकर घर भेज दिया गया. घर आने के बाद परिजनों को पता चला कि वह गर्भवती है. परिषद से सवाल उठाया है. क्या 8 महीने की गर्भावस्था हॉस्टल अधीक्षक, वार्डन और प्राचार्या से छुपी रह सकती है? यह साफ तौर पर मामले को दबाने और साक्ष्यों को नष्ट करने की आपराधिक साज़िश को दर्शाता है.
दुषकर्म पीड़िता ने बच्चे को दिया जनम
पीड़िता द्वारा नवजात शिशु को जन्म दिए जाने के बाद वास्तविक अपराधी की पहचान और संस्थागत शोषण की सत्यता स्थापित करने के लिए नवजात शिशु, मुख्य संदिग्धों और संस्था के कर्मचारियों के तत्काल DNA प्रोफाइलिंग/टेस्ट कराने की मांग की गई है.परिषद ने पॉक्सो एक्ट POCSO Act के तहत नाबालिग के प्रसव की सूचना पुलिस को न देने वाले अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सकों पर धारा 21 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है.
एक और बड़ी घटना घट चुकी है
गुरुकुल आवासीय विद्यालय में पूर्व में भी एक 4 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आ चुका है. जिसमें अदालत से दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं को देखते हुए इस संस्थान की मान्यता फौरन प्रभाव से स्थायी रूप से रद्द करने और इसे ब्लैकलिस्ट करने की मांग की गई है.
परिषद ने ये की है मांग
स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर समयबद्ध निष्पक्ष जांच।
नवजात शिशु एवं सभी संदिग्धों का तत्काल डीएनए टेस्ट।
वास्तविक दोषियों, स्कूल संचालक हॉस्टल अधीक्षक, वार्डन, प्राचार्य, तत्कालीन न करने वाले अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ POCSO Act, SC/ST Act एवं भा.न्या.सं. (BNS) की कठोरतम धाराओं में FIR व गिरफ्तारी।
गुरुकुल आवासीय विद्यालय, कबीरधाम की मान्यता और सरकारी अनुदान तुरंत रद्द करना।
पीड़ित बेटी और परिवार को 5 करोड़ की Witness Protection Unit के तहत सुरक्षा, धारा 183 BNS के तहत मजिस्ट्रेट बयान और उचित चिकित्सा व पुनर्वास सहायता।
हॉस्टल का उपस्थिति रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड अदालत/जांच एजेंसी के संरक्षण में तुरंत जब्त किए जाएं।











