जशपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिला जशपुर में कुनकुरी ब्लॉक के बेहराखर में बनी 10 लाख की सड़क की तस्वीर देखकर आप यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि सड़क कमजोर है या सिस्टम? कहने को तो ये 10 लाख रुपये की लागत से बनी करीब ढाई सौ मीटर की CC रोड है लेकिन सड़क की हालत देखकर सवाल उठता है कि क्या ये सड़क बनी है या सिर्फ सरकारी पैसा खर्च हुआ है? सड़क से अभी से गिट्टियां और मैटेरियल बाहर झांकने लगे हैं.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान यहां न तो कारीगर दिखे न मिस्त्री. और न ही जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर कभी यहां झांकने आए. लोगों के मुताबिक सड़क बनाने का काम सिर्फ मजदूरों और ठेकेदार के भरोसे छोड़ दिया गया.
बेहराखर पंचायत के सचिव सुखराम ने “मूनादी डॉट कॉम” को फोन पर बताया कि ग्राम पंचायत बेहराखार के शंकर नगर बिरहोर बस्ती में 10 दिन पहले RCC सड़क का निर्माण पूरा हुआ है. लेकिन तेज बारिश होने की वजह से ढलाई का ऊपरी हिस्सा पानी मे बह गया. इसलिए सडक खराब दिख रही है.
ताज्जुब करने वाली बात यह है कि पंचायत सचिव को न तो सड़क की लंबाई की जानकारी है न ही लागत की. उन्होंने बताया कि ठीक से उन्हें याद नहीं है लेकिन साढ़े 9 या 10 लाख की सड़क है. साथ साथ यह भी बताया कि इंजीनियर सिर्फ शुरू दिन इस काम को देखने आए थे उसके बाद कोई नहीं आया.
अब सवाल ये है कि अगर सड़क निर्माण में तकनीकी गुणवत्ता की निगरानी ही नहीं हुई. तो 10 लाख रुपये की इस सड़क की गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा? और इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू देखिए कि ये सड़क किसी आलीशान कॉलोनी के लिए नहीं, बल्कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदाय बिरहोर समाज के लोगों के लिए बनाई गई है.
बेहराखर में बिरहोर समाज की बड़ी आबादी रहती है. इन्हीं लोगों के उत्थान और उनकी समस्याओं को समझने के लिए करीब तीन महीने पहले राज्यपाल भी यहां पहुंचे थे. यानी एक तरफ सरकार और संवैधानिक पदों पर बैठे लोग बिरहोर समाज के विकास और उत्थान की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ उसी समाज के लिए बनी 10 लाख की सड़क सवालों के घेरे में है.
स्थानीय लोगों ने सड़क का वीडियो बनाकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत भी दर्ज कराई है. अब देखना ये है कि शिकायत सिर्फ हेल्पलाइन के रिकॉर्ड में दर्ज होकर रह जाती है या फिर सड़क की गुणवत्ता, लागत और निर्माण प्रक्रिया की बाकायदा जांच होती है.
क्योंकि सवाल सिर्फ ढाई सौ मीटर सड़क का नहीं है…
सवाल उन लोगों के भरोसे का है।जिनके नाम पर विकास की योजनाएं बनाई जाती हैं।
दस लाख की सड़क अगर कुछ ही समय में अपना मैटेरियल दिखाने लगे…
तो सवाल उठेगा ही—
“सड़क कमजोर है… या सिस्टम की नींव?”
बारिश में बह गया मनरेगा का काम! बारिश में धंसी सड़क, पुलिया क्षतिग्रस्त, गुणवत्ता पर उठे सवाल
बिलासपुर/मस्तूरी : बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड की ग्राम पंचायत कर्रा से विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं. यहां मनरेगा के तहत जलभराव वाली सामुदायिक जमीन के सुधार के लिए कराया गया काम बारिश के बाद बुरी तरह प्रभावित हो गया. सड़क जगह-जगह धंस गई. बड़े-बड़े गड्ढे बन गए और पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो गई.
ग्रामीणों का आरोप है कि बारिश आते ही काम की स्थिति खराब हो गई. जिससे उन्हें रोजाना आवाजाही में परेशानी उठानी पड़ रही है. अब सवाल उठ रहा है कि जिस काम पर सरकारी रकम और बड़ी संख्या में मानव दिवस खर्च हुए. उसकी गुणवत्ता की निगरानी आखिर किस स्तर पर हुई?
ग्राम पंचायत कर्रा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जलभराव वाली सामुदायिक जमीन के सुधार का काम कराया गया था. नागरिक सूचना पटल पर दर्ज जानकारी के मुताबिक काम की शुरुआत 8 अप्रैल 2026 को हुई थी. इसमें श्रमिक लागत के रूप में 2 लाख 24 हजार 89 रुपये और सामग्री के लिए 1 हजार 507 रुपये दर्ज हैं.
वहीं, कुल 858 मानव दिवस का भी उल्लेख किया गया है. लेकिन बारिश के बाद मौके की तस्वीरें काम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही हैं. ग्रामीणों के मुताबिक बारिश होते ही सड़क कई जगह से धंस गई और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए. जिस रास्ते से ग्रामीणों का रोजाना आना-जाना होता है. वहीं अब उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
सड़क की बदहाली के साथ पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से समस्या और गंभीर हो गई है. बारिश के दौरान यहां आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है और ग्रामीणों को किसी बड़े हादसे की आशंका सता रही है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मनरेगा के काम में मजदूरी पर 2 लाख 24 हजार रुपये से ज्यादा की राशि दर्ज है और 858 मानव दिवस का भी उल्लेख है. तो आखिर बारिश की मार में काम की यह स्थिति कैसे बन गई?
क्या काम के दौरान निर्धारित गुणवत्ता का ध्यान रखा गया था? क्या निर्माण पूरा होने के बाद मौके पर इसकी जांच की गई थी? और सड़क-पुलिया के क्षतिग्रस्त होने की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी? ग्रामीणों ने पूरे मामले में मौके का निरीक्षण कराकर काम की गुणवत्ता की जांच करने और सड़क-पुलिया की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है. अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन सवालों पर क्या जवाब देता है और क्या जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होती है.











