कोरबा : विवादास्पद प्राचार्य मनोज सराफ के पाली हाईस्कूल में संभावित पुनः पदस्थापना की चर्चा ने पूरे नगर में आक्रोश की लहर दौड़ा दी है. जिस प्राचार्य को अपने अधीनस्थ व्याख्याता के साथ मारपीट और अनुशासनहीनता के आरोप में इसी साल स्कूल संचालन के प्रथम सत्र में हटाया गया था. उसी की फिर से वापसी की खबर से छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन लामबंद हो गए हैं.
मालूम हो कि प्राचार्य मनोज सराफ का विवादों से पुराना नाता रहा है. जहां वर्ष 2018 में तानाखार हाईस्कूल में पदस्थ रहने के दौरान स्कूल भवन के भीतर ही एक युवती के साथ आपत्तिजनक हालत में ग्रामीणों ने रंगे हाथ पकड़ा था और कटघोरा पुलिस के हवाले किया था, जहां एसडीएम कोर्ट में उन्हें पेश किया गया और जमानत न मिलने पर उनको जेल की हवा खानी पड़ी थी. साथ ही बिलासपुर संभागायुक्त ने भी उन्हें सस्पेंड कर दिया था.
उस वक्त के कलेक्टर मो. केसर अब्दुल हक ने जिला शिक्षा विभाग को साफ निर्देश दिए थे कि मनोज सराफ की पदस्थापना छात्राएं अध्यनरत वाले स्कूल में बिलकुल न किया जाए. इसके बावजूद वर्ष 2019 में सैकड़ो छात्राएं अध्यनरत वाले पाली हाईस्कूल में उनकी पदस्थापना कर दी गई.
यहां 2021 में उनके आचरण से नाराज छात्रों द्वारा हटाए जाने आंदोलन के दबाव में हटाना पड़ा. लेकिन एक साल बाद 2022 में उन्हें फिर पाली हाईस्कूल भेज दिया गया. जहां इस सत्र के शुरुआत में ही फिजिक्स व्याख्याता प्रखर पांडेय की साथ मारपीट के आरोप में जिला प्रशासन ने सराफ को पाली से तत्काल हटाकर छुरी स्कूल में पदस्थ कर दिया. साथ ही व्याख्याता का भी अन्यंत्र स्थानांतरण कर दिया.
लेकिन अब फिर प्राचार्य मनोज सराफ के वापसी की चर्चा से छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय सामाजिक संगठनों में आक्रोश की भावना पनपने लगा है. सूत्रों के मुताबिक विवादित प्राचार्य का पाली मोह नही छूट रहा और वे कुछ ही दिनों में फिर पाली हाईस्कूल में वापसी करने वाले हैं और राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त पर ध्वजारोहण भी करेंगे. ऐसी चर्चा है. इस वापसी की खबर को लेकर पाली में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं. और छात्रों का कहना है कि जिस प्राचार्य ने शिक्षक के साथ मारपीट की. जिस पर शर्मनाक मामले में जेल जाने का दाग है. उसे हम एक भी दिन बर्दास्त नही करेंगे और स्कूल में नही देखना चाहते. ऐसे में जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग हमारे भविष्य से खिलवाड़ न करें.
मामले में अभिभावकों का भी गुस्सा फूटा है और उनका कहना है- कलेक्टर के सख्त निर्देश के बाद भी बेटियों के स्कूल में ऐसे व्यक्ति को 2 बार भेजा गया. जो विवादास्पद हो. अब तीसरी बार भेजने की तैयारी है. हम अपनी बेटियों को असुरक्षित हाथों में नही सौपेंगे. वहीं सामाजिक संगठनों ने चेतावनी देते कहा कि खराब कैरेक्टर वाले दागदार प्राचार्य की अगर पाली हाईस्कूल में फिर पोस्टिंग की गई तो सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा. जिसकी पूरी जवाबदारी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की होगी.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिस्टम किसके दबाव में है? जब पूर्व कलेक्टर ने छात्राएं वाले स्कूल में पदस्थ न करने के निर्देश देकर पालन करने को कहा था. तो सैकड़ो छात्राएं अध्यनरत वाले पाली हाईस्कूल में बार-बार वापसी क्यों? क्या नियम-कानून और छात्राओं की सुरक्षा से बड़ा कोई और दबाव है? शिक्षा मंदिर में प्राचार्य गुरु और संरक्षक होता है.
लेकिन जब संरक्षक ही दागदार हो, जेल जा चुका हो, और अपने शिक्षक के साथ मारपीट को अंजाम दिया हो. तो उस स्कूल की बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी? पाली हाईस्कूल छात्राओं की इज्जत और शिक्षा का प्रयोगशाला नही है. जिला प्रशासन को फौरन साफ करना चाहिए कि क्या वह छात्राओं की सुरक्षा के साथ हैं या एक विवादित अधिकारी के साथ.. बहरहाल पाली की बेटियां बोल रही हैं- हमें पढ़ाई चाहिए, प्राचार्य सराफ नही..











