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धमतरी : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक मामला सामने आया है. कुरूद विकासखंड की शासकीय माध्यमिक शाला दर्रा में अंग्रेजी विषय के एकमात्र शिक्षक के तबादले के बाद स्कूल में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी. इस मांग को लेकर 31 अगस्त को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे.
क्या है पूरा मामला?
स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाने वाला एक ही शिक्षक था. उनके तबादले के बाद कोई दूसरा शिक्षक उपलब्ध नहीं कराया गया. इससे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई. वे हाथ जोड़कर अधिकारियों से गुहार लगा रहे थे कि स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक की जल्द व्यवस्था की जाए.
अभिभावकों का आरोप है कि उनकी समस्या को सुनने और समाधान देने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया. जिला शिक्षा अधिकारी मधुलिका तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे बच्चों को जबरदस्ती कार्यालय लेकर आए हैं.
जब इस घटना की कवरेज के लिए मीडिया मौके पर पहुंची तो आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने मीडिया पर भी सवाल खड़े किए. एक वीडियो में वे मीडिया को निर्देश देते नजर आईं कि खबर में वही प्रकाशित किया जाए जो वे बता रही हैं.
DEO ने स्पष्ट किया कि जिस शिक्षक का तबादला किया गया था, उनके खिलाफ एलआईसी एजेंट के रूप में काम करने की शिकायत मिली थी. इसी आधार पर कार्रवाई की गई थी. हालांकि बाद में उन्होंने स्कूल में शिक्षक की कमी को देखते हुए संबंधित शिक्षक को वापस दर्रा स्कूल भेजने की बात कही। इससे बच्चों को शिक्षक मिलने की उम्मीद जगी है.
अभिभावकों और छात्रों की प्रतिक्रिया
अभिभावकों और छात्रों का कहना है कि वे सिर्फ अपने बच्चों के भविष्य की चिंता लेकर अधिकारी के पास पहुंचे थे. उन्हें समाधान की जगह कथित अपमान और कठोर व्यवहार का सामना करना पड़ा. उन्होंने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है.
यह घटना ऐसे समय हुई जब प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के दावे किए जा रहे हैं. हाल ही में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में स्कूल परिसर में बिना अनुमति यूट्यूबरों और बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे. साथ ही शिक्षकों की भर्ती और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई थी.
सवाल सिर्फ एक स्कूल में शिक्षक की कमी का नहीं है. सवाल उस व्यवस्था का भी है जहां बच्चे और अभिभावक अपनी जायज मांग लेकर पहुंचते हैं तो उन्हें कैसा व्यवहार मिलता है. अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं.

 

 

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