गौरेला : घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर छत्तीसगढ़ के गौरेला में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. सियाराम गैस एजेंसी गौरेला की कार्यप्रणाली पर आम उपभोक्ताओं को परेशान करने, निर्धारित मूल्य से ज्यादा पैसा वसूलने और गैस सिलेंडर की कथित कालाबाजारी के गंभीर आरोप लगे हैं. मामले को लेकर नगर पालिका परिषद गौरेला के अध्यक्ष मुकेश दुबे ने जिला खाद्य अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है. शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों ने गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली के साथ-साथ जिला खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
नंबर वालों’ को इंतजार, बिना नंबर वालों की जेब ढीली तो तत्काल सिलेंडर?
शिकायत में आम नागरिकों के हवाले से आरोप लगाया कि निर्धारित नंबर आने के बावजूद उपभोक्ताओं को तीन से चार दिन बाद गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाता है. जबकि बिना नंबर वाले उपभोक्ताओं को कथित तौर पर ₹500 तक अतिरिक्त शुल्क लेकर सिलेंडर देने की बात सामने आई है. अगर शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा उठाकर अतिरिक्त वसूली का गंभीर मामला बन सकता है.
DAC नंबर लेकर 2-3 दिन में डिलीवरी का भरोसा, फिर 10-15 दिन तक इंतजार!
शिकायत में एजेंसी की कथित कार्यप्रणाली को लेकर एक और गंभीर आरोप लगाया गया है. बताया गया है कि मोबाइल पर DAC नंबर आने के बाद एजेंसी की तरफ से उपभोक्ता को फोन कर DAC नंबर मांगा जाता है और कथित तौर पर यह भरोसा दिलाया जाता है कि दो से तीन दिन में सिलेंडर घर पहुंच जाएगा. लेकिन शिकायत के मुताबिक कई उपभोक्ताओं को 10 से 15 दिन तक सिलेंडर नहीं मिलता. फोन करने पर कथित तौर पर बहाने बनाकर कॉल काट देने की शिकायत भी की गई है.
घर तक डिलीवरी की व्यवस्था पर भी सवाल, गोदाम से सिलेंडर लेने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति उपभोक्ताओं के घर तक करने के बजाय गोदाम से ही सिलेंडर लेने की स्थिति बनाई जा रही है. जिसे कंपनी के निर्धारित नियमों का उल्लंघन बताया गया है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी की जिम्मेदारी किसकी है और गैस एजेंसी की डिलीवरी व्यवस्था की नियमित जांच कौन कर रहा है?
सुशासन त्योहार में भी शिकायत, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुशासन त्योहार के दौरान भी एजेंसी को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं. लेकिन कार्रवाई नहीं होने से कथित तौर पर एजेंसी के हौसले बुलंद हैं. और आम जनता परेशान हो रही है। अब सवाल सीधे जिला खाद्य विभाग की भूमिका पर उठ रहा है—अगर शिकायतें पहले भी मिल रही थीं तो जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
खाद्य विभाग के सामने अब अग्निपरीक्षा
नगर पालिका अध्यक्ष ने जिला खाद्य अधिकारी से शिकायत को संज्ञान में लेकर कालाबाजारी के आरोपों पर खाद्य अधिनियम के तहत कार्रवाई करने और आम जनता को कथित परेशानी से निजात दिलाने की मांग की है. शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि गैस एजेंसी द्वारा आम जनता की जेब पर कथित रूप से डाला जा रहा ‘डाका’ बंद कराया जाए.
कार्रवाई नहीं हुई तो धरने की चेतावनी
मामला अब केवल शिकायत तक सीमित नहीं रहने वाला है. शिकायत पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि आवश्यक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में जनहित में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और इसकी सारी जवाबदारी जिला खाद्य विभाग की होगी.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला खाद्य विभाग मौके पर पहुंचकर गैस एजेंसी के स्टॉक, बिक्री दर, बुकिंग रिकॉर्ड, DAC रिकॉर्ड, डिलीवरी रजिस्टर और उपभोक्ताओं से ली जा रही राशि की जांच करेगा? या फिर आम उपभोक्ताओं की शिकायतें भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएंगी? फिलहाल लिखित शिकायत ने गौरेला की गैस वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब निगाहें जिला खाद्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं.
2026-08-21











