निर्जला एकादशी व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. यह व्रत सभी एकादशी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाता है. निर्जला एकादशी के नाम से ही आप जान सकते हैं कि यह व्रत बिना जल ग्रहण किए रखा जाता है, इसलिए इसका नाम निर्जला एकादशी है. यह व्रत बिना अन्न और जल के रखा जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, 5 पांडवों में से एक भीमसेन अपने जीवनकाल में मात्र यही एक व्रत रखे थे. इस वजह से इसे भीम एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं निर्जला एकादशी की तिथि, पूजा मुहूर्त, पारण समय और महत्व.
निर्जला एकादशी 2023 तिथि मुहूर्त
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 मई मंगलवार को दोपहर 01 बजकर 07 मिनट से शुरू होगी और इस तिथि का समापन 31 मई बुधवार को दोपहर 01 बजकर 45 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर निर्जला एकादशी व्रत 31 मई को रखा जाएगा.
निर्जला एकादशी पूजा मुहूर्त 2023
31 मई को निर्जला एकादशी व्रत के पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 24 मिनट से सुबह 08 बजकर 51 मिनट तक है. उसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक है.
सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग में निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी के दिन सवार्थ सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं. 31 मई को सुबह 05 बजकर 24 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो सुबह 06:00 बजे तक है. रवि योग भी सुबह 05:24 बजे से सुबह 06:00 बजे तक ही है.
निर्जला एकादशी 2023 पारण समय
जो लोग 31 मई को निर्जला एकादशी का व्रत रखेंगे, वे अगले दिन 1 जून गुरुवार को व्रत का पारण करेंगे. 1 जून को निर्जला एकादशी व्रत पारण का समय सुबह 05 बजकर 24 मिनट से सुबह 08 बजकर 10 मिनट तक है. इस समय अवधि में पारण करके व्रत को पूरा कर लेना चाहिए. इस दिन द्वादशी तिथि दोपहर 01 बजकर 39 मिनट पर खत्म होगी.
भीम ने क्यों रखा था निर्जला एकादशी व्रत?
कथा के अनुसार, भीमसेन को अधिक भूख लगती थी, जिसके कारण वे कभी व्रत नहीं रखते थे. लेकिन वे भी चाहते थे कि मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति हो, उनको पुण्य प्राप्त हों. वे चाहते थे कि कोई एक ऐसा व्रत हो, जिसे करने से वे पाप मुक्त हो जाएं और मोक्ष भी मिल जाए. तब उनको निर्जला एकादशी व्रत रखने को कहा गया. ऋषि-मुनियों के सुझाव पर उन्होंने निर्जला एकादशी का व्रत रखा. व्रत के पुण्य प्रभाव और विष्णु कृपा से वे पाप मुक्त हो गए और अंत में मोक्ष को प्राप्त हुए.
निर्जला एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को सभी एकादशी व्रतों का पुण्य फल प्राप्त होता है. यह काफी कठिन व्रत है क्योंकि इसमें पानी तक ग्रहण नहीं करते हैं. विष्णु पूजा करने से मोक्ष मिलता है. इस वजह से ही भीमसेन ने निर्जला एकादशी व्रत रखा था. सभी पांडवों ने भी निर्जला एकादशी व्रत रखा था, जिसकी वजह से इसे पांडव एकादशी भी कहते हैं.










