बदनसीब एक्टर, बेमिसाल अदाकारी, करोड़ों रुपये कमाए लेकिन नहीं बना पाए आशियाना

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एक बेमिसाल एक्टर, जिसने हिंदी सिने जगत में अपनी अलहदा एक्टिंग की अमिट छाप छोड़ी. बेमिसाल अदाकारी से लाखों दिलों पर सालों तक राज किया. उनकी धीमे-धीमे ठहराव वाली संवाद अदायगी भला कौन भूल सकता है? ‘नौकर’, ‘नमकीन’, ‘आंधी’ ,’चरित्रहीन’, ‘नया दिन नई रात’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों नजर आ चुके इस एक्टर ने बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड, नेशनल फिल्म अवॉर्ड के अलावा बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड हासिल किए. क्या आप यकीन कर पाएंगे कि इस एक्टर ने लाखों-करोड़ों कमाए लेकिन उसके बाद भी अपना आशियाना कभी बना नहीं सके.

फिल्म इंडस्ट्री में लोग इस एक्टर को बेहद पसंद करते थे. अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा इनके अच्छे दोस्त थे. कहते हैं हेमा मालिनी को बहुत पसंद करते थे, लेकिन उनकी शादी धर्मेंद्र से हो गई. अब तो आप समझ ही गए होंगे कि हम बात किसकी कर रहे हैं. बात हो रही है बॉलीवुड एक्टर संजीव कुमार की…

‘हम हिंदुस्तानी’ से फिल्मी दुनिया में रखा कदम
संजीव कुमार ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत थियेटर से की थी. एक्टिंग के शौक की वजह से ‘इप्टा’ से जुड़े फिर इंडियन नेशनल थियेटर से जुड़ गए. 1960 में फिल्म ‘हम हिंदुस्तानी’ फिल्म से फिल्मी दुनिया में कदम रखा. इसके बाद कई फिल्मों में काम किया लेकिन असली पहचान मिली ‘राजा और रंक’ से. संजीव एक ऐसे एक्टर थे जिसने रोमांटिक, हास्य, गंभीर हर तरह के रोल पर्दे पर निभाए थे.

‘शोले’ के ठाकुर से हो गए अमर
संजीव कुमार हिंदी सिनेमा के वो एक्टर हैं, जिनका लोहा हर कोई मानता था. ‘शोले’ में बिना हाथ वाले ‘ठाकुर’ का रोल हो या ‘शतरंज के खिलाड़ी’ में ‘मिर्जा सज्जाद’ का किरदार उन्होंने इन किरदारों को बखूबी निभाया. ‘शोले’ के किरदार के लिए उन्हें आजतक याद किया जाता है. ये कहना अतिशक्ति नहीं होगी कि इस रोल से वह हमेशा के लिए अमर हो गए.

क्यों जिंदगी भर किराए पर रहे संजीव कुमार
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि लाखों-करोड़ों कमाने वाले संजीव कुमार जीवनभर किराए के मकान में रहे. हालांकि कई बार उन्होंने घर खरीदने की कोशिश भी की. लेकिन किसी ने किसी वजह से वह ऐसा नहीं कर पाए. एक बार संजीव को घर पसंद आ गया था उस घर की कीमत 50 हजार थी. घर के मालिक के पास वह पैसे लेकर पहुंचे तो घर के मालिक ने कहा कि आपको अब 70 हजार रुपये देने होंगे. कुछ दिन बाद वह 70 हजार लेकर पहुंचे तो मकान मालिक ने 1 लाख रुपये की डिमांड कर डाली. ये बात उन्हें बहुत बुरी लगी और फिर उन्होंने उश घर को खरीदने से ही इंकार कर दिया. फिर कुछ दिनों बाद जुहू में उन्हें एक घर पसंद आया. उन्होंने घर खरीद भी लिया था. लेकिन फिर उन्हें पता चला कि उस घर पर कुछ कानूनी कार्रवाई चल रही है और घर खरीदते समय उन्हें कुछ बताया नहीं गया तो उन्हें वो घर भी छोड़ना पड़ा. इसके बाद वह खुद के लिए कभी घर खरीद ही नहीं पाए और पूरी जिंदगी एक किराए के मकान में रहे.

अंधविश्वास के कारण नहीं की शादी!
कहते हैं हेमा मालिनी को बहुत पसंद करते थे, लेकिन उनकी शादी धर्मेंद्र से हो गई. फिर संजीव का दिल सुलक्षणा पंडित पर आया, नजदीकी भी रही लेकिन शादी नहीं की. इसकी वजह थी उनके अंदर समाया हुआ भय, जिसके बारे में खुद संजीव कुमार ने बताया था. फिल्म ‘कत्ल’ की शूटिंग के समय संजीव कुमार ने एक बार दिवंगत फिल्म समीक्षक जयप्रकाश चौकसे को बताया था, ‘उनके पिता जब 10 साल के हुए थे तो उनके दादा की मौत हो गई थी. जब मैं 10 साल का हुआ तो मेरे पिता की मौत हो गई’. इस बात को संजीव कुमार ने दिल की गहराई में बसा लिया था. संजीव कुमार इस कदर अंधविश्वासी हो गए थे उन्हें लगता था कि वह भी अगर शादी करेंगे तो बच्चे होंगे, बच्चा 10 साल का होगा और मैं मर जाऊंगा. विधी के इसी विधान को रोकने के लिए उन्होंने कभी शादी नहीं की.

क्यों निभाते थे बूढ़े आदमी का किरदार
संजीव कुमार ने एक बार बूढ़े आदमी का किरदार निभाने की दिलचस्प मगर हैरान करने वाली वजह बताई थी. तबस्सुम ने उनसे एक बार पूछा था कि इतने जवान होने के बावजूद आप बूढ़े आदमी के रोल क्यों निभाते हैं? इस पर संजीव ने कहा था, ‘मैं कभी बूढ़ा होने वाली नहीं, क्योंकि अपने परिवार के ज्यादातर मर्दों की तरह 50 से ज्यादा उम्र तक जीवित नहीं रहूंगा. इसलिए, मैं स्क्रीन पर बुढ़ापे को महसूस करना चाहता हूं.’ संजीव कुमार का अनुमान सही साबित हुआ, क्योंकि 1985 में हार्ट अटैक से उनका देहांत हो गया था. तब उनकी उम्र करीब 47 साल थी. किताब ‘एन एक्टर्स एक्टर: दि ऑथराइस्ड बायोग्राफी ऑफ संजीव कुमार’ लिखने वाले हनीफ जावेरी के अनुसार, एक्टर के दादा शिवलाल जरीवाला, जेठालाल जरीवाला, भाई किशोर जरीवाला और निकुल जरीवाला की 50 से कम उम्र में मृत्यु हो गई थी. हैरानी की बात यह है कि सभी का निधन हार्ट अटैक से हुआ था.

 

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