विधेयक पर बीजेपी-कांग्रेस के बीच श्रेय लेने की मची होड़

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छत्तीसगढ़ में धनुहार, धनुवार, किसान, सौंरा, साओंरा और बिंझिया समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने वाले संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022 को राज्यसभा ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। विधेयक के पारित हो जाने के बाद अब कांग्रेस और बीजेपी में इसका श्रेय लेने की होड़ मची हुई है।

इस विधेयक के पारित होते ही कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने राम के बाद अपने-अपने आदिवासियों पर भी दावा ठोक दिया है। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बीजेपी सांसदों की बदौलत 12 समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में लाया जा सका है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने कहा कि जब सदन में आदिवासियों से संबंधित विधेयक पर चर्चा हो रही थी, तो छत्तीसगढ़ के सभी कांग्रेस सांसद जानबूझकर सदन से अनुपस्थित थे। वे नहीं चाहते थे कि विधेयक पर चर्चा हो। इसके पहले भी पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का विरोध कर कांग्रेस ने राज्यसभा में उसे पारित नहीं होने दिया था।

अरुण साव ने आरोप लगाते हुए कहा कि इसी तरह आदिवासी और पिछड़े वर्ग को मिलने वाले आरक्षण के विरुद्ध कांग्रेस ने कोर्ट में अपने लोगों से मुकदमा दर्ज करवाया था, फिर उन्हें बाद में पद देकर इनाम भी दिया। कांग्रेस को इन वंचित तबकों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करना बंद कर देना चाहिए।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विधेयक के पारित हो जाने के बाद अब 70 सालों से आरक्षण के संवैधानिक अधिकारों से वंचित 12 समुदायों को इसका लाभ मिलने लगेगा। उन्होंने इस विधेयक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह के प्रयासों का परिणाम बताया है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा कि मात्रात्मक गलती के चलते यह समुदाय आजादी के बाद भी इतने सालों तक अपने अधिकारों से दूर रहे। उन्होंने इन जनजाति समुदायों को सूची में शामिल करने के लिए पीएम मोदी के साथ हुई चर्चा और पत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सरकार ने संविधान में जरूरी संशोधन करते हुए इन समुदायों की समस्या दूर की। भाजपा इन समुदायों की खुशी में शामिल होगी।

सरकार के प्रयास सफल हुए- CM भूपेश बघेल

इधर राज्य के मुखिया भूपेश बघेल ने विधेयक राज्यसभा से पारित होने को लेकर प्रदेश सरकार की पीठ ठोंकी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के 12 जनजाति समूहों को बधाई देते हुए कहा कि इनका अनुसूचित सूची में शामिल होना राज्य सरकार के लगातार प्रयासों का परिणाम है। हमने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मात्रात्मक त्रुटि के कारण हो रही आदिवासी समुदायों की परेशानी को बताया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति आयोग को विभिन्न समाजों के माध्यम से जो ज्ञापन मिले, उनकी सुनवाई कर एक प्रस्ताव तैयार किया। जिसे भारत सरकार को भेजा गया। इसका नतीजा है कि आज ये विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों से मंजूर हो चुका है।

इन जनजातियों को किया गया शामिल

भारिया भूमिया के पर्याय के रूप में भूईंया, भूईयाँ भूयां नाम के अंग्रेजी संस्करण को बिना बदलाव किए भरिया के रूप में भारिया का सुधार। पांडो के साथ पंडो, पण्डो, पन्डो धनवार के पर्याय के रूप में धनुहार, धनुवार गदबा गोंड के साथ गोंड़ कौंध के साथ कोंद कोडाकू के साथ कोड़ाकू नगेसिया, नागासिया के पर्याय के रूप में किसान धनगढ़ का परिशोधन धांगड़

बता दें कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज की 42 जातियां निवास करती हैं। जिन 12 जातियों को जनजाति सूची में शामिल किया गया है, वे लिपिकीय त्रुटियों के कारण संविधान में मिलने वाले अधिकारों और लाभ से आजादी के इतने वर्षों बाद भी वंचित थीं। पिछले साल दिसंबर में लोकसभा ने संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया था।

 

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