छत्तीसगढ़ के बस्तर में आज 28 जुलाई से नक्सलियों का शहीदी सप्ताह शुरू हो गया है, जो 3 अगस्त तक चलेगा। नक्सलियों के इस शहीदी सप्ताह के देखते यात्री ट्रेनों के पहिए भी थम गए हैं। किरंदुल-विशाखापट्टनम पैसेंजर और नाइट एक्सप्रेस ये दोनों ट्रेनें दंतेवाड़ा दे आगे किरंदुल नहीं जाएंगी। यानी दंतेवाड़ा ही इन दोनों ट्रेनों का अंतिम स्टॉपेज होगा। हालांकि, धीमीगति से मालगाड़ियों की आवाजाही बरकरा रहेगी। इधर, बस्तर में अब फोर्स भी अलर्ट है।
दरअसल, किरंदुल-कोत्तावालसा रेलवे लाइन पर दंतेवाड़ा से किरंदुल के बीच का पैच नक्सलियों का गढ़ है। यहां बासनपुर-झिरका के घने जंगल में माओवादी ज्यादातर रेल पटरियों को उखाड़ ट्रेनों को डिरेल करते हैं। इसी दहशत की वजह से इस बार भी यात्री ट्रेनों के परिचालन पर ब्रेक लग गया है। धीमी गति से मालगाड़ी आना-जाना करेगी। उधर, कमालूर में पुलिस कैंप स्थापित होने के बाद से इलाका थोड़ा शांत तो जरूर हुआ है, लेकिन माओवादियों की उपस्थिति अब भी बरकरार है।
भांसी रेलवे स्टेशन में बांधा था बैनर
दंतेवाड़ा-किरंदुल रेलवे मार्ग के बीच स्थित भांसी रेलवे स्टेशन में कुछ दिन पहले नक्सलियों ने बैनर बांधा था। बैनर के माध्यम से नक्सलियों ने 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाने की बात लिखी थी। जिसके बाद से बस्तर में फोर्स को अलर्ट कर दिया गया। कहीं नक्सली ट्रेनों को नुकसान न पहुंचा दें इसलिए परिचालन पर ब्रेक लगा दिया गया है।
बस्तर में फोर्स अलर्ट
नक्सलियों के शहीदी सप्ताह को देखते हुए बस्तर में पुलिस फोर्स को भी अलर्ट किया गया है। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर जिले में जवानों को लगातार ऑपरेशन पर निकला जा रहा है। जवान नक्सलियों के कोर इलाके में घुस रहे हैं। अब तक करीब 5 से ज्यादा नक्सल कैंप को ध्वस्त किया गया है। 4 दिन पहले हुई एक मुठभेड़ में पुरुष माओवादी को ढेर किया गया है।
यात्री ट्रेन को किया था डिरेल
साल 2021 में भी इसी जगह माओवादियों ने एक यात्री ट्रेन को डिरेल किया था। हालांकि, रफ्तार कम होने की वजह से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ था। किरंदुल-बचेली से आयरन ओर लेकर विशाखापट्टनम जाने वाली मालगाड़ियों को भी नक्सली अपना निशाना बना चुके हैं। जिससे रेलवे और NMDC को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। इसलिए अब रेलवे दोबारा कोई रिस्क लेना नहीं चाहता है।
छुट्टियां मनाने और मेडिकल कामों के लिए जाते हैं लोग
किरंदुल से विशाखापट्टनम के बीच सिर्फ 2 यात्री ट्रेनें चलती हैं। इनमें से एक दिन में चलने वाली किरंदुल-विशाखापट्टनम पैसेंजर ट्रेन तो वहीं दूसरी नाइट एक्सप्रेस है। इन दोनों ट्रेनों में बस्तर के सैकड़ों लोग सफर करते हैं। यह ट्रेन ओडिशा होते हुए विशाखापट्टनम पहुंचती है। ऐसे में ओडिशा के अरकू की खूबसूरत वादियों का आनंद और विशाखापट्टनम में बीच की सैर करने समेत मेडिकल कामों के लिए जाने वाले लोगों की संख्या अधिक होती है।
साल 2022 में इतने दिन नहीं चली थी ट्रेन
- जनवरी महीने में 7 दिन और फरवरी में सिर्फ एक दिन ट्रेन नहीं चली।
- नक्सली बंद की वजह से 10 मार्च से 15 मार्च के बीच ट्रेनों का परिचालन बंद रहा।
- 23 मार्च से 29 मार्च तक नक्सलियों के साम्राज्यवाद विरोधी सप्ताह के तहत किरंदुल तक ट्रेनें नहीं पहुंची थी।
- 25 अप्रैल को माओवादियों ने दंडकारण्य बंद का आह्वान किया था। जिसके चलते 23 अप्रैल से 26 अप्रैल तक यात्री ट्रेनें नहीं चली।
फिर 28 अप्रैल से 6 मई के बीच ब्रिज के मेंटेंसन कार्य को लेकर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। यह तारीख बढ़ कर 12 मई हो गई थी। - जून माह में अग्निपथ विरोध के चलते 19 और 20 जून को ट्रेन बंद रही।
- इसके अलावा 26 जून से 2 जुलाई तक माओवादियों के आर्थिक नाकेबंदी सप्ताह को देखते ट्रेनों के पहिए थमे थे।











