छात्रा पर छत का प्लास्टर गिरने का मामला

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तिफरा के मिडिल स्कूल में छात्रा पर छत का प्लास्टर गिरने के मामले में स्कूल शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। हाई कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद गुरुवार को स्कूल शिक्षा और नगर निगम के अधिकारी व इंजीनियर मौके पर पहुंचे, तब पता चला कि मिडिल स्कूल के मेंटेनेंस के लिए 3.84 लाख और चार नए कक्ष के निर्माण के लिए पहले से ही 33 लाख रुपए स्वीकृत हैं। इस पर काम ही नहीं कराया।

कलेक्टर सौरभ कुमार ने गुरुवार को ही यह राशि जारी कर दी है। वहीं, स्मार्ट सिटी के फंड से दो करोड़ की लागत से 24 कमरे बनाए जा रहे हैं। इनमें 18 कमरे बन चुके हैं। 6 कमरों का निर्माण सितंबर तक कर लिया जाएगा। साथ ही, नगर निगम के इंजीनियरों ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी है, जिसमें उन्होंने बताया है कि स्कूल भवन अब रिपेयरिंग करने लायक नहीं है, बल्कि इसे डिस्मेंटल करना होगा।

शहर से लगे तिफरा मिडिल स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से सोमवार को छठवीं कक्षा की एक छात्रा घायल हो गई थी। ऐसे 1400 और स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं और वहां पढ़ाई हो रही है। हाई कोर्ट ने संज्ञान में लिया है। जैसे ही यह जानकारी सरकारी दफ्तरों तक पहुंची तो गुरुवार को अधिकारी हरकत में आए और बीईओ के साथ ही नगर निगम के इंजीनियरों का दल स्कूल पहुंचा।

जर्जर स्कूल भवन के मेंटेनेंस और चार अतिरिक्त कक्ष बनाने के लिए मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत पहले ही राशि स्वीकृत हो चुकी है। इसके बाद भी अफसर यह राशि लिए बैठे रहे। घटना के बाद अब फिर फाइलों में हरकत हुई है। निगम के इंजीनियरों ने आज मौके का मुआयना करने के बाद कलेक्टर व निगम कमिश्नर को अपनी रिपोर्ट दे दी है। इसमें स्पष्ट कर दिया है कि भवन को तोड़कर नए सिरे से बनाना होगा।

बच्चों और शिक्षकों की जान खतरे में

तिफरा के मिडिल स्कूल का दौरा करने वाली टीम में नगर निगम के जोन कमिश्नर ए. एक्का, कार्यपालन यंत्री प्रवीण शुक्ला व अनुपम तिवारी और सब इंजीनियर रश्मि मिश्रा थे। भास्कर ने जब इस टीम से बात की तो उनका कहना है कि बिल्डिंग काफी जर्जर है और इसका मेंटेनेंस करने के बजाय अब डिस्मेंटल कर नया बनाने की जरूरत है।

जर्जर भवन के संबंध में शिक्षकों ने भी शिकायत की थी, लेकिन महकमे के अफसरों ने ध्यान नहीं दिया और सैकड़ों बच्चों के साथ शिक्षकों की जान भी जोखिम में डाल दी थी। घटना के बाद हाई व हायर सेकंडरी स्कूल से चार-चार कमरे मिले हैं और दो पालियों में पढ़ाई कराई जा रही है। बता दें कि तीनों कक्षाओं को मिलाकर 854 बच्चे हैं, जो जर्जर बिल्डिंग के नीचे पढ़ते थे।

 

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