राज्य में मेंटल हेल्थ एक्ट 2017 का पालन नहीं होने को लेकर लगाई गई जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य को शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें बताना होगा कि एक्ट के प्रावधानों के पालन को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं। हाई कोर्ट लीगल सर्विस कमेटी ने वर्ष 2017 में जनहित याचिका लगाई थी। इसमें मेंटल हेल्थ एक्ट के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया था कि मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों के लिए कई नियम तय किए गए हैं। इसके तहत राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का गठन करने सहित अन्य प्रावधान हैं।
प्रदेश के बिलासपुर के सेंदरी में मेंटल हॉस्पिटल है, लेकिन यहां सुविधाओं की कमी है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था। तब से इस मामले पर लगातार सुनवाई चल रही है। जनवरी 2023 में राज्य सरकार की तरफ से शपथ पत्र प्रस्तुत कर बताया गया था कि बिलासपुर के मेंटल हॉस्पिटल में 100 बेड हैं, जिसे 200 बेड में अपग्रेड किया जा रहा है। दो अन्य जिलों में 30-30 बेड की सुविधा दी जा रही है।
इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं की तरफ से बताया गया कि राज्य की जनसंख्या को देखते हुए यह सुविधा काफी नहीं है। शुक्रवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस एनके चंद्रवंशी की बेंच ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को शपथ पत्र के साथ बताने को कहा है कि मेंटल हॉस्पिटल व अन्य 30-30 बेड की सुविधा वाले अस्पतालों में मरीजों की जरूरतों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? साथ ही प्रदेश में मानसिक रोगियों के लिए पिछले तीन वर्षों में किए गए फंड के आवंटन की जानकारी देने को कहा गया है। इस मामले पर 10 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
परिजन कक्ष के निर्माण की गति धीमी, कलेक्टर नाराज
कलेक्टर संजीव कुमार झा ने सेंदरी स्थित राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मरीज के परिजनों के लिए बन रहे कक्ष का निरीक्षण किया। निर्माण गति धीमी होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। वहां मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। चिकित्सकों से मरीजों को बेहतर इलाज करने कहा।
चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल में लगभग 133 मानसिक रोगियों का इलाज किया जा रहा है और ओपीडी में पूरे प्रदेश भर से रोज 100 से ज्यादा मरीज इलाज व परामर्श के लिए आते हैं। कलेक्टर ने चिकित्सालय के महिला वार्ड, पुरूष वार्ड व पुनर्वास वार्ड का निरीक्षण किया और मानसिक रोगियों के बारे में जानकारी ली। कलेक्टर दवाई काउंटर भी गए और वहां पूछा कि दवाइयां उपलब्ध है या नहीं।











