बालोद पर्यावरण पार्क के करोड़ों का ‘झोल’, सीसीएफ के आदेश को डीएफओ ने दिखाया ठेंगा!

भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की साजिश? जांच अधिकारी की सुस्ती पर उठे सवाल, अब दिल्ली दरबार (PMO) पहुंचेगी शिकायत!
सीसीएफ के ‘स्मरण पत्र’ को भी डकार गए बालोद के जिम्मेदार! 10 दिन की मोहलत खत्म, पर जांच की फाइल अब भी बंद।
रायपुर में होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस:
बालोद पर्यावरण पार्क घोटाले की खुलेगी पोल, नपेंगे बड़े अफसर!
क्या दोषियों को मिल रहा है सरकारी संरक्षण? सीसीएफ दुर्ग के कड़े निर्देशों के बाद भी बालोद में पसरा सन्नाटा।

मिशन बालोद: करोड़ों का भ्रष्टाचार, रद्दी की टोकरी में जांच के आदेश!
खबरदार! पर्यावरण पार्क घोटाले में अब राजधानी से होगा बड़ा धमाका।
जांच में ‘झोल’ या कुर्सी का मोह? बालोद वन विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में।
दुर्ग से आदेश, दिल्ली से उम्मीद: बालोद के ‘पार्क घोटाले’ पर अब आर-पार की जंग!
विभाग को अंतिम सूचना/चेतावनी पत्र भेजा गया।
करोड़ों का भ्रष्टाचार और जांच अधिकारी की रहस्यमयी चुप्पी!
🚩 बालोद वन विभाग में मची खलबली! 🚩
पर्यावरण पार्क बालोद में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार की जांच क्या ठंडे बस्ते में डाल दी गई है?

भ्रष्टाचार पर भारी ‘जांच का ग्रहण’:
बालोद वन मंडलाधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, क्या दोषियों को मिल रहा है खुला संरक्षण?
बालोद: पर्यावरण पार्क बालोद में हुए करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। एक ओर जहां उच्चाधिकारियों ने इस मामले में तत्काल जांच के कड़े निर्देश दिए थे, वहीं दूसरी ओर जांच अधिकारी/वन मंडलाधिकारी (DFO) बालोद की रहस्यमयी चुप्पी और देरी ने विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। अब यह मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित न रहकर, ‘कर्तव्य में लापरवाही’ और ‘वरिष्ठों के आदेश की अवहेलना’ का बड़ा मुद्दा बन गया है।

मुख्य वन संरक्षक के आदेशों को ठेंगे पर रखा?
दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य वन संरक्षक (CCF) क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग ने पत्र क्रमांक सा.शिका./01 दिनांक 01-01-2026 के माध्यम से पर्यावरण पार्क में हुई वित्तीय अनियमितताओं की तत्काल जांच के आदेश दिए थे। जब लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो CCF कार्यालय ने पुनः पत्र क्रमांक नि.स./सा.शिका./1719 दिनांक 27-02-2026 को कड़ा स्मरण-पत्र जारी किया। इसमें स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया था कि 10 दिनों के भीतर स्पष्ट अभिमत के साथ जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।
विडंबना यह है कि समय सीमा बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारी की फाइलें नहीं हिली हैं। न तो मौके पर कोई ठोस कार्रवाई दिखी और न ही शिकायतकर्ता को जांच की स्थिति से अवगत कराया गया।

भ्रष्टाचार की आंच और संरक्षण के आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी जानबूझकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं ताकि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सके और दोषियों को बचाया जा सके। करोड़ों के गबन, फर्जी मजदूरी भुगतान वाउचर और सामग्री आपूर्ति में हुई धांधली के सबूतों के बावजूद जांच प्रक्रिया में विलंब होना, अधिकारियों की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
“जब राजधानी रायपुर से स्पष्ट आदेश जारी हो चुके हैं, तो जिला स्तर पर फाइलें क्यों रोकी जा रही हैं? क्या जांच अधिकारी खुद को नियमों और वरिष्ठों के आदेशों से ऊपर समझते हैं?”

अब दिल्ली की दहलीज पर पहुंचेगी गूंज
इस प्रशासनिक सुस्ती और आदेशों की अवहेलना के विरुद्ध अब शिकायतकर्ता ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार:
राजधानी में प्रेसवार्ता: बहुत जल्द राजधानी रायपुर में एक बड़ी प्रेसवार्ता आयोजित कर पर्यावरण पार्क में हुए भ्रष्टाचार के प्रमाण सार्वजनिक किए जाएंगे।
PMO तक शिकायत: जांच अधिकारी की संदिग्ध कार्यप्रणाली और जानबूझकर की जा रही देरी के संबंध में अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) दिल्ली और केंद्रीय वन मंत्रालय को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जा रही है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं: 👇
वरिष्ठ कार्यालय के 10 दिन के अल्टीमेटम के बावजूद जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत क्यों नहीं हुआ?
शिकायतकर्ता की उपस्थिति में जांच करने के निवेदन को दरकिनार क्यों किया गया?
क्या प्रशासनिक तंत्र भ्रष्टाचार की जड़ों को उखाड़ने के बजाय उन्हें पानी दे रहा है?
📍 मुख्य बिंदु:
CCF दुर्ग ने 01-01-2026 और फिर 27-02-2026 को 10 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी थी।
आज समय सीमा बीत जाने के बाद भी वन मंडलाधिकारी/जांच अधिकारी बालोद मौन हैं।
आदेश की अवहेलना और दोषियों को संरक्षण देने के लग रहे गंभीर आरोप।
अब यह लड़ाई केवल बालोद तक सीमित नहीं रहेगी! भ्रष्टाचार के सबूतों के साथ रायपुर में प्रेसवार्ता और PMO दिल्ली तक शिकायत की तैयारी।
जब रक्षक ही मौन हो जाए, तो जनता को सड़क पर उतरना ही पड़ता है। प्रशासन जवाब दे—जांच रिपोर्ट कहाँ है? ⚖️










