तहलका पत्रिका की दहाड़: भ्रष्टाचार के खिलाफ अब आर-पार की जंग! 📢
छुईखदान वन परिक्षेत्र में सरकारी खजाने की लूट का बड़ा खुलासा। कागजों में दौड़ रहा काम, जमीन पर सिर्फ 10-15% काम की सच्चाई! 😱

DFO खैरागढ़ को अंतिम चेतावनी: दागी RFO, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी और वन रक्षक को पद से हटाकर जांच शुरू करें।
साक्ष्यों का खतरा: पद पर रहते हुए ये अधिकारी जांच को प्रभावित कर सकते हैं?
ग्रामीणों से छल: न काम की जानकारी, न बजट का पता। आखिर जनता का पैसा गया कहां?
🔥 जल्द होगी ग्रामीणों के साथ बड़ी बैठक! तहलका पत्रिका परिवार घर-घर जाकर बताएगा सरकारी योजनाओं का सच और आपके हक का बजट।
“कागजी जंगल और असली लूट: छुईखदान वन विभाग में भ्रष्टाचार का खेल बेनकाब!”
“सावधान! साक्ष्यों से छेड़छाड़ की तैयारी? जांच से पहले दोषियों की कुर्सी छीनना जरूरी।”
“ग्रामीणों के रोजगार पर डाका, अफसरों ने बजट को अपना समझा!”
“अब जनता मांगेगी हिसाब: तहलका पत्रिका परिवार आ रहा है आपके गांव, बताने आपकी योजनाओं का सच।”
भ्रष्टाचार की आंच में छुईखदान वन परिक्षेत्र: अधिकारियों को हटाने के लिए डीएफओ खैरागढ़ को अंतिम चेतावनी पत्र
छुईखदान वन परिक्षेत्र में भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं में बंदरबांट का एक बड़ा मामला तूल पकड़ता जा रहा है। तहलका पत्रिका परिवार द्वारा इस पूरे प्रकरण में अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन मंडलाधिकारी (DFO) खैरागढ़ को अंतिम बार पत्राचार कर आरोपित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से मूल पद से हटाने की मांग की गई है।
साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका, पद पर बने रहना जांच के लिए खतरा:
शिकायतकर्ता का स्पष्ट आरोप है कि वर्तमान वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO), सहायक परिक्षेत्र अधिकारी और संबंधित वन रक्षक सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के घेरे में हैं। जब तक ये अधिकारी अपने पदों पर काबिज रहेंगे, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
“इन अधिकारियों की मौजूदगी में सरकारी दस्तावेजों और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने तथा गवाहों को डराने-धमकाने की पूर्ण संभावना बनी हुई है। अतः जांच शुरू होने से पूर्व इनका वहां से हटना अनिवार्य है।”
फील्ड पर काम नदारद, स्थल निरीक्षण से कतरा रहे जिम्मेदार
विभागीय सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वीकृत कार्यों में से फील्ड पर मात्र 10 से 15 प्रतिशत कार्य ही धरातल पर उतारा गया है। बाकी बजट का कहीं अता-पता नहीं है। जब भी ‘तहलका पत्रिका परिवार’ द्वारा स्थल निरीक्षण की मांग की जाती है, तो संबंधित अधिकारी टालमटोल की नीति अपनाते हैं। यह टालमटोल स्वयं इस बात का प्रमाण है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
ग्रामीणों के हक पर डाका: न काम मिला, न बजट की जानकारी
सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं को ताक पर रखकर ग्रामीणों के रोजगार के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ग्रामवासियों का आरोप है कि उन्हें न तो योजनाओं की जानकारी दी जाती है और न ही कार्य के बजट का विवरण सार्वजनिक किया जाता है। पारदर्शिता का अभाव इस पूरे तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है।
प्रशासनिक सुस्ती के बीच अब ‘तहलका पत्रिका परिवार’ ने स्वयं कमान संभालने का लिया निर्णय :
जन-चौपाल का आयोजन: बहुत जल्द प्रभावित ग्रामों में ग्रामीणों के साथ एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी।
इस बैठक में ग्रामीणों को सरकार की विभिन्न योजनाओं, स्वीकृत कार्यों और उनके वास्तविक बजट की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
भ्रष्टाचार का पर्दाफाश: मौके पर ही कार्यों की वास्तविकता और कागजी दावों का मिलान कर शासन-प्रशासन के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।










