भ्रष्टाचार व फर्जीवाड़े के खिलाफ चली आ रही लंबी लड़ाई में “तहलका पत्रिका” की पैनी नज़र और निर्भीक पत्रकारिता की एक बार फिर बड़ी जीत हुई!

जांच में बेनकाब हुए भ्रष्टाचार के खिलाड़ी…चेहरे से उठा नक़ाब!
जांच रिपोर्ट को देखते हुए वन मंडलाधिकारी ‘खैरागढ़’ ने दोषियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक दंडात्मक कार्यवाही हेतु शासन को लिख दिया पत्र
भ्रष्टाचारियों पर गिरेगी कानूनी गाज:
खैरागढ़ वन विभाग में जालसाजी का ‘खेला’ खत्म, रेंजर सहित 3 पर FIR की तैयारी!
खैरागढ़/छुईखदान। ‘तहलका पत्रिका’ के खुलासे ने खैरागढ़ वन मंडल में मचे भ्रष्टाचार के साम्राज्य को हिला कर रख दियाहै।
विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद अब उन अधिकारियों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, जिन्होंने सरकारी खजाने को अपनी जागीर समझ लिया था। जांच अधिकारी के प्रतिवेदन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है।
इन धाराओं के चक्रव्यूह में फंसेंगे ‘साहब’
जांच में फर्जीवाड़ा प्रमाणित होने के बाद अब दोषियों पर निम्नलिखित धाराओं के तहत कार्यवाही की तलवार लटक रही है:👇
धोखाधड़ी (420 IPC/BNS): सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर फर्जीवाड़ा करने के लिए।
दस्तावेजों में कूटरचना (467, 468 IPC/BNS): पद का दुरुपयोग कर फर्जी रसीदें, वाऊचर और फर्जी मस्टर रोल तैयार करने के लिए।
लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात (409 IPC/BNS): जनता के पैसे का गबन करने के जुर्म में।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act): अवैध रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए।
बेपर्दा हुए भ्रष्टाचार के चेहरे
वन मंडलाधिकारी खैरागढ़ के पास पहुंची रिपोर्ट में छुईखदान परिक्षेत्र के तीन दिग्गजों के काले कारनामों पर मुहर लगी है:

वो महारथी ये हैं 👇
अशोक कुमार वैष्णव (रेंजर) वन परिक्षेत्र छुईखदान भ्रष्टाचार के मास्टरमाइंड होने का आरोप प्रमाणित।
प्रकाश मरकाम (सहायक परिक्षेत्र अधिकारी): कुम्ही फर्जीवाड़े में सक्रिय भागीदारी सिद्ध।
गिरीश नेताम (वनरक्षक): कुम्ही जमीनी स्तर पर जालसाजी को अंजाम देने का दोषी।
DFO की सख्त चिट्ठी से शासन में खलबली
वन मंडलाधिकारी (DFO) खैरागढ़ ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए शासन को कड़ा पत्र लिखा है। पत्र में स्पष्ट तौर पर इन अधिकारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही और कानूनी शिकंजा कसने की अनुशंसा की गई है।
“जांच की आंच अब मंत्रालय तक पहुंच चुकी है। तहलका पत्रिका की शिकायत ने जिस भ्रष्टाचार की जड़ें खोदी थीं, आज विभाग ने भी उस पर अपनी मुहर लगा दी है।”
अब ‘इंसाफ’ का इंतजार:
क्या शासन दिखाएगा इच्छाशक्ति?
इस बड़े खुलासे के बाद आम जनता के बीच भारी आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या इन रसूखदार अधिकारियों को सस्पेंड कर जेल भेजा जाएगा ?
जनता की निगाहें अब मुख्यमंत्री सचिवालय और वन विभाग के आला अधिकारियों के आदेश पर टिकी हैं।
देखना होगा कि शासन की कलम इन भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कितनी तेजी से चलती है!










