तहलका पत्रिका की दहाड़: हमारी मेहनत पर मलाई काटने वाले ‘कॉपी-पेस्ट’ गिरोह पर कसेगा कानूनी शिकंजा, पुलिस तक पहुंची शिकायत
बालोद। खोजी पत्रकारिता की दुनिया में अपनी स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक साख के लिए पहचाने जाने वाले समाचार पत्र ‘तहलका पत्रिका’ के तेवर अब उन तत्वों के खिलाफ बेहद तल्ख हो गए हैं, जो बिना किसी मेहनत के दूसरों की खबरों पर अपनी दुकान चमका रहे हैं। तहलका पत्रिका की साक्ष्यों से लैस खोजी खबरों को चुराकर (Content Theft) बाजार में भ्रम फैलाने वाले और पत्रकारिता को कलंकित करने वाले स्वयंभू तत्वों के खिलाफ अब सीधे पुलिस महकमे में मोर्चा खोल दिया गया है।
तहलका पत्रिका प्रबंधन द्वारा पुलिस विभाग को एक बेहद कड़ा और वैधानिक धाराओं से सुसज्जित शिकायत पत्र प्रेषित किया जा रहा है, जिसमें समाचारों की चोरी करने वाले, अनुशासनहीनता फैलाने वाले और बिना सिर-पैर के अफवाह उड़ाने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्यवाही और सख्त समझाइश देने की मांग की गई है।
मेहनत हमारी, मलाई तुम्हारी?
अब नहीं चलेगा यह खेल!
पूरा मामला यह है कि ‘तहलका पत्रिका’ ने हाल ही में पूरे दमखम और जमीनी दस्तावेजों (साक्ष्यों) के साथ एक वन परिक्षेत्र छुईखदान में हुए बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। इस खोजी रिपोर्ट का असर यह हुआ कि शासन-प्रशासन हरकत में आया और मामले की परतें खोलने के लिए बाकायदा एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया।
लेकिन, जैसे ही जांच शुरू हुई, और दोषियों के विरुद्ध कार्यवाहियां शुरू हुई वैसे ही क्षेत्र के कुछ ‘सुपरफास्ट’ और कथित तौर पर खबरची तत्वों ने तहलका पत्रिका की इस मूल खबर, तथ्यों और भाषा की हूबहू चोरी कर ली। हद तो तब हो गई जब इन लोगों ने बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज, साक्ष्य या समझ के, केवल वाहवाही लूटने और निजी स्वार्थ साधने के लिए सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर भ्रामक जानकारियां परोसनी शुरू कर दीं।
ईमानदार अधिकारी-कर्मचारी न हों परेशान: तहलका पत्रिका का संकल्प:
तहलका पत्रिका का एकमात्र उद्देश्य व्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। हमारी खोजी पत्रकारिता का मकसद कभी भी किसी निष्ठावान व्यक्ति को ठेस पहुंचाना नहीं होता। लेकिन इन ‘समाचार चोरों’ द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों के कारण विभाग के ईमानदार अधिकारी और कर्मचारी मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
तहलका पत्रिका स्पष्ट करता है कि हमारी लड़ाई केवल और केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ है; किसी बेकसूर या ईमानदार कर्मचारी को परेशान करने वाले इन ‘भ्रमवीरों’ को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस को सौंपे जा रहें सबूत, कानूनी धाराओं के तहत होगी नपाई
समाचार पत्र की बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और खबरों की इस तरह सरेआम डकैती को लेकर पुलिस को सौंपे जा रहे पत्र में कानून की प्रासंगिक धाराओं का हवाला दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की मानहानि, जालसाजी, भ्रामक सूचनाएं फैलाने और आईटी एक्ट (IT Act) व कॉपीराइट अधिनियम की धाराओं के तहत ऐसे तत्वों को चिन्हित करने की प्रक्रिया होगी शुरू।
“हम दिन-रात एक करके, जान जोखिम में डालकर साक्ष्य जुटाते हैं ताकि सच सामने आ सके। लेकिन कुछ लोग बिना किसी साक्ष्य के हमारी खबरों को चुराकर केवल भ्रम का बाजार गर्म कर रहे हैं। ऐसे तथाकथित लोगों के खिलाफ अब कानूनी रास्ता अख्तियार किया गया है। पुलिस प्रशासन से मांग की जा रही है कि इन्हें सख्त से सख्त कानूनी समझाइश और दंड दिया जाए, ताकि पत्रकारिता की गरिमा सुरक्षित रहे।”
— संपादकीय विभाग, तहलका पत्रिका बालोद,
सावधान रहें! तहलका पत्रिका की खबरों को बिना अनुमति कॉपी करने, तोड़-मरोड़ कर पेश करने या उसकी आड़ में किसी ईमानदार अधिकारी को ब्लैकमेल या परेशान करने की कोशिश करने वालों की उल्टी गिनती अब शुरू हो रही है। सबूत पुलिस की टेबल पर पहुंच रहें हैं, जल्द ही कानूनी हंटर चलना तय है।










