कुंभकर्णी नींद में सोया एनएच विभाग: बालोद में बदहाल NH-930 बना ‘हादसों का हाईवे

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कुंभकर्णी नींद में सोया एनएच विभाग: बालोद में बदहाल NH-930 बना ‘हादसों का हाईवे

तहलका की पड़ताल:
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग?
​कुंभकर्णी नींद में सोया एनएच विभाग:
बालोद में बदहाल NH-930 बना ‘हादसों का हाईवे’,
चमकती कारों में गुजरते जनप्रतिनिधि व अफसरों को नहीं दिख रहा जनता का दर्द!
​नया बस स्टैंड बना जी का जंजाल:
नाली खोदकर भूले जिम्मेदार, व्यापारियों का धंधा चौपट

​बालोद : राष्ट्रीय राजमार्ग 930 (NH-930) पर बालोद के मुख्य आवागमन मार्ग—नया बस स्टैंड क्षेत्र—की स्थिति दिनों-दिन बद से बदतर होती जा रही है. विकास के नाम पर सड़क के बीचोबीच बने जानलेवा गड्ढे और किनारे खोदी गई अधूरी नालियां अब आम जनता, राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों के लिए मुसीबत का सबब बन चुकी हैं. बार-बार समाचार पत्रों के माध्यम से ध्यान आकृष्ट कराए जाने के बावजूद नेशनल हाईवे के जिम्मेदार अधिकारी गहरी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।
​मुख्य बिंदु:
समस्या एक, परेशानियां अनेक
​भगवान भरोसे नया बस स्टैंड मार्ग:
जिले का सबसे व्यस्ततम इलाका माने जाने वाले नया बस स्टैंड क्षेत्र में नाली निर्माण के लिए बड़े और लंबे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। निर्माण कार्य ठप पड़ा है और पूरा क्षेत्र हादसों के मुहाने पर खड़ा है।
​ठप पड़ा कारोबार, भुखमरी की नौबत:
दुकानों के ठीक सामने बेतरतीब खुदाई कर जिम्मेदार अधिकारी भूल चुके हैं। ग्राहकों की पहुंच बंद होने से स्थानीय व्यापारियों का व्यापार पूरी तरह ठप हो चुका है, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
​रोज हजारों गाड़ियां और जानलेवा खतरा:
इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन और यात्री बसें गुजरती हैं। सड़क के किनारे खोदी गई गहरी नालियों और बीच सड़क के विशालकाय गड्ढों के कारण कभी भी कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है।
​ विडंबना यह है कि इसी खस्ताहाल रास्ते से रोजाना जनप्रतिनिधियों और आला अधिकारियों की चमचमाती गाड़ियां सायरन बजाते हुए गुजरती हैं। बावजूद इसके, जनता की रोजमर्रा की इस तकलीफ पर किसी भी जिम्मेदार की नजर नहीं पड़ रही है।
​”आखिर कब जागेगा प्रशासन?”
​पूर्व में भी जनहित से जुड़ी इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन स्थिति ‘ढाक के तीन पात’ वाली बनी हुई है। क्या विभाग किसी मासूम की जान जाने के बाद ही चेतेगा? यह सवाल आज बालोद का हर नागरिक पूछ रहा है.

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