बिलासपुर : स्वाधीनता दिवस के मौके पर पुलिस मैदान में जो कुछ भी हुआ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. सत्तारूढ़ दल के ही प्रमुख पदाधिकारी के साथ जिस तरह की हरकत जिम्मेदार अधिकारियों ने किया. उससे आशंका इस बात की हो रही है कि कही यह पूर्व नियोजित तो नहीं था? दरअसल बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल के समर्थकों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार तो यही बता रहा है. पूरे कार्यक्रम में जो अव्यवस्था और बैठक व्यवस्था की बदइंतजामी के चलते विधायक अमर अग्रवाल के तमाम समर्थक कार्यक्रम के बीच में ही उठकर चले गए.
जिला भाजपा के वरिष्ठ नेता और कोषाध्यक्ष गुलशन ऋषि का हाथ पकड़कर खींचने वाले अधिकारी को हालांकि मौके पर ही पूर्व एल्डरमैन ने जमकर फटकार लगाई. निगम सभापति विनोद सोनी को भी मंच पर बैठने के लिए पद के हिसाब से उपयुक्त जगह नहीं मिली. महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष हर्षिता पांडेय को भी तव्वजो नहीं दी गई.
अपनी ही सरकार के राष्ट्रीय कार्यक्रम में उपेक्षा से नाराज पार्टी के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता और कई पार्षद कार्यक्रम छोड़ कर बाहर आ गए.
बड़ा सवाल यह है कि सत्तारूढ़ पार्टी के लोगो को नहीं पहचान पाने वाले अधिकारी की ड्यूटी वीआईपी गेट पर क्यों लगाई गई. इससे प्रशासन की भद्द पिट गई. अमर अग्रवाल जब मंत्री थे तो अधिकारियों की हिम्मत नहीं होती थी. आज वे मंत्री भले ही नहीं है. विधायक तो हैं उनके समर्थकों के साथ बदसलूक किए जाने का मामला इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाली है. भाजपा की गुटीय राजनीति से भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है. चर्चा तो यह भी है कि अमर अग्रवाल के समर्थकों के साथ ऐसा व्यवहार और कार्यक्रम में अव्यवस्था कही किसी के इशारे पर तो नहीं की जा रही?
2026-08-15











