कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान कुदरत का कहर, 360 से ज्यादा मौतें, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय की बहू समेत 400 से ज्यादा लोग लापता

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नेपाल : नेपाल की भोटेकोशी नदी में बुधवार को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के कहर से कम से कम 362 लोगों की मौत हो गई और करीब 300 भारतीय नागरिक समेत करीब 1400 लोग लापता हैं. ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक लापता लोगों में विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. सुबह के समय आई इस अचानक बाढ़ ने तीन जिलों में भारी तबाही मचाई और लोगों, घरों, वाहनों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बहा ले गई. यह हाल के सालों में नेपाल की सबसे घातक आपदाओं में से एक है. मध्य नेपाल में कई कस्बे और गांव तबाह हो गए. जरूरी पुल बह गए और एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं ठप हो गई. बाढ़ ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ इलाकों में आवाजाही बाधित है. जानकारों का कहना है कि इसकी वजह ग्लेशियर से हुआ. हिमस्खलन हो सकता है. राहत बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है. भारत की ओर से भी मानवीय सहायता और 37.5 टन आपदा राहत सामग्री भेजी गई है.
रायपुर जिले के महादेव घाट (थाना डी.डी. नगर) की निवासी मोनिका यादव के नेपाल में बाढ़ के बाद से लापता होने की खबर है. वे 22 अगस्त 2026 से नेपाल प्रवास पर थीं और वर्तमान में परिजनों से उनका संपर्क टूट गया है. राज्य सरकार संबंधित अधिकारियों एवं केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर उनकी सुरक्षित खोजबीन के प्रयास कर रही है.
लापता लोगों में पूर्व विधायक सुभ्रांशु रॉय की पत्नी शर्मिष्ठा भौमिक रॉय भी शामिल हैं. परिवार के मुताबिक 25 अगस्त की रात से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया है. इस खबर के बाद परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकला 32 लोगों का एक दल भी फिलहाल संपर्क से बाहर है. इस समूह में 30 पर्यटक और दो टूर मैनेजर शामिल थे. यह दल 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था. बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे समूह के सदस्य नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवागढ़ी स्थित इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे. इसके कुछ देर बाद अचानक बाढ़ आने की खबर सामने आई.
नेपाल ने रासुवा बाढ़ पर विदेशी नागरिकों के लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम गठित
नेपाल के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने रासुवा जिले में आई भीषण फ्लैश फ्लड के मद्देनजर विदेशी नागरिकों की सहायता के लिए तुरंत एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन कर दिया है. नेपाल दूतावास, नई दिल्ली के आधिकारिक खाते ने इस बाबत जानकारी दी है, जिसकी रिपोर्ट प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) ने भी साझा की.
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि रासुवा में हालिया बाढ़ से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. कई लोग लापता हैं, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. नई गठित टीम खोज-बचाव, सूचना सत्यापन और प्रभावित या लापता विदेशी नागरिकों को कांसुलर सहायता मुहैया कराने का केंद्रीय समन्वय करेगी. बाढ़ 26 अगस्त को सुबह के समय शुरू हुई थी. तिब्बत सीमा के पास आइस-रॉक एवलांच के कारण नदी अवरुद्ध हुई और फिर अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव भोटे कोसी और त्रिशूली नदी घाटी में फैल गया.
नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मुताबिक अब तक आठ जिलों से 350 से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं. सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं. जिनमें विदेशी पर्यटक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं. सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से बचाव और राहत कार्य चला रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने राजनयिक मिशनों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और परिवारों से अपील की है कि वे अनधिकृत खबरों से बचें और आधिकारिक चैनलों के जरिए ही जानकारी लें.
टीम के संपर्क नंबर और ईमेल भी जारी किए गए हैं, ताकि प्रभावित विदेशी नागरिकों के परिजन आसानी से संपर्क कर सकें. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऊपरी इलाकों में नई झील बनने से आगे और बाढ़ का खतरा बना हुआ है.

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