भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा वन परिक्षेत्र छुईखदान:

Spread the love

नियमों को ताक पर रख वित्तीय अनियमितता का खेल

छुईखदान: शासन के स्पष्ट निर्देशों और कड़े नियमों के बावजूद वन परिक्षेत्र छुईखदान में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का मामला गर्माता जा रहा है। यहाँ पदस्थ वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) पर आरोप है कि उन्होंने न केवल शासन की कार्यप्रणाली का मजाक उड़ाया है, बल्कि वित्तीय अनुशासन की धज्जियाँ उड़ाते हुए भारी अनियमितता की है।
प्रमुख बिंदु और गड़बड़झाले का कच्चा चिट्ठा 👇
अधूरा कार्य, पूरा भुगतान: 👇
क्षेत्र में स्वीकृत कार्यों का केवल 10 से 15 प्रतिशत ही धरातल पर क्रियान्वित किया गया है, जबकि कागजों पर इसे शत-प्रतिशत दिखाकर शासकीय राशि का गबन किया जा रहा है।
साक्ष्यों का अभाव (No Photos): शासन के सख्त निर्देश हैं कि किसी भी कार्य के प्रारंभ होने से पूर्व और पूर्ण होने के पश्चात की जियो-टैग फोटो अनिवार्य है। इसके बावजूद, यहाँ जानबूझकर फोटो नहीं लिए जा रहे हैं ताकि वास्तविकता छिपी रहे


RTI की अवहेलना:
जिम्मेदार अधिकारियों को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम का न तो ज्ञान है और न ही वे इसका पालन करना चाहते हैं। प्रथम अपीलीय अधिकारी और राज्य सूचना आयोग को गुमराह करना यहाँ की कार्यशैली बन चुकी है।

संबंधित कानूनी धाराएं और दंडात्मक प्रावधान:👇
भ्रष्टाचार के इस मामले में अधिकारियों पर निम्नलिखित धाराओं के तहत कार्रवाई की तलवार लटक रही है:👇
धारा 409 (IPC/BNS) लोक सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन:

धारा 420 (IPC/BNS) धोखाधड़ी और बेइमानी से संपत्ति के लिए प्रेरित करना:

धारा 467,468 दस्तावेजों का कुटरचना (Forgery)

भ्रष्टाचार निवारण: अधिनियम,1988 लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग:

RTI की धारा 20 सूचना छिपाना या गलत जानकारी देना:

आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) तक पहुंचेगी फाइल:
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भी इसी क्षेत्र में भ्रष्टाचार के चलते दो से तीन कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अब इस पूरे प्रकरण की फाइल तैयार कर शासन, प्रशासन, वित्त विभाग और विशेष रूप से आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को सौंपने की तैयारी।
“शासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करना और वित्तीय अनियमितता बरतना अक्षम्य है। यदि 10% कार्य कर 100% का भुगतान लिया गया है, तो यह सीधे तौर पर राजकोष की चोरी है।”

छुईखदान वन परिक्षेत्र में चल रहा यह ‘खेल’ अब उजागर होने की कगार पर है। RTI के तहत जानकारी न देना और जानबूझकर अधिक राशि का आहरण करना यह सिद्ध करता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी त्वरित कार्रवाई करता है।

Author