तहलका पत्रिका की खबर का बड़ा असर:
छुईखदान वन परिक्षेत्र में फर्जीवाड़े की खुली पोल, वन परिक्षेत्र अधिकारी,सहायक परिक्षेत्र अधिकारी और वनरक्षक पर लटकी निलंबन की तलवार
खैरागढ़/छुईखदान: भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘तहलका पत्रिका’ की पैनी नजर और निरंतर शिकायतों का बड़ा असर देखने को मिला है। वन परिक्षेत्र छुईखदान में हुए वित्तीय फर्जीवाड़े की जांच अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। वन मंडलाधिकारी (DFO) खैरागढ़ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल निष्पक्ष जांच के आदेश दिए, बल्कि अब दोषियों के निलंबन हेतु उच्च विभाग को अंतिम जांच प्रतिवेदन भेजने की तैयारी भी कर ली है।

जांच के पहले ही प्रहार में ढहा भ्रष्टाचार का किला:👇
डीएफओ खैरागढ़ के निर्देश पर शुरू हुई जांच में तथ्यों को खंगाला गया तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच अधिकारी ने जब जमीनी स्तर पर श्रमिकों के बयान दर्ज किए, तो पहले ही बिंदु पर विभाग के दावों की हवा निकल गई।
जांच में पाया गया कि “वनरक्षक ग्रीस नेताम कुम्ही” ने कागजों पर 65 से 70 वर्ष की बुजुर्ग महिलाओं से कठिन मजदूरी (गढ्ढा खोदाई) कार्य कराना दिखाया था। जब इन महिलाओं के बयान लिए गए, तो उनके बयानों में भारी भिन्नता पाई गई, जिससे स्पष्ट हो गया कि मास्टर रोल में केवल नाम चढ़ाकर सरकारी राशि का गबन किया गया है।
रिश्तेदारों के नाम पर लूटा सरकारी खजाना:👇
इस पूरे खेल का सबसे काला पक्ष तब सामने आया जब यह पता चला कि बयान देने पहुंचे सभी ‘तथाकथित’ श्रमिक असल में वनरक्षक के ही करीबी रिश्तेदार थे। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर अपनों के बैंक खातों में पैसा डालने का यह सुनियोजित षड्यंत्र अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।

सेवानिवृत्ति से पहले गाज गिरना तय:👇
सूत्रों के अनुसार, वन मंडलाधिकारी खैरागढ़ ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO), सहायक परिक्षेत्र अधिकारी (Deputy Ranger) और वनरक्षक के निलंबन के साफ संकेत मिल चुके हैं। विशेष रूप से, वर्तमान रेंजर के सेवानिवृत्त होने से ठीक पहले निलंबन की इस कार्रवाई ने विभाग के भीतर हड़कंप मचा दिया है।
मुख्य निष्कर्ष:अधिकारी ही जिम्मेदार
भुगतानकर्ता की जवाबदेही:👇 जांच में स्पष्ट किया गया है कि परिक्षेत्र में होने वाले हर कार्य और उसके भुगतान के लिए ‘भुगतानकर्ता अधिकारी’ (RFO) पूर्णतः जिम्मेदार है।
फर्जी मास्टर रोल:👇
बुजुर्गों और परिजनों के नाम पर फर्जी हाजिरी भरकर लाखों के हेरफेर की पुष्टि।
सख्त कार्रवाई की तैयारी:👇 डीएफओ द्वारा उच्च कार्यालय को निलंबन हेतु पत्र प्रेषित किया जा रहा है।
‘तहलका पत्रिका’ की इस मुहिम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सजग पत्रकारिता के सामने भ्रष्टाचार की दीवारें टिक नहीं सकतीं। अब सबकी नजरें विभाग द्वारा जारी होने वाले आधिकारिक निलंबन आदेश पर टिकी हैं।







