सूरजपुर : सूरजपुर जिला के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के बहुचर्चित भाजपा युवा नेता हरिनंदन राजवाड़े हत्याकांड में मंगलवार देर रात बड़ा घटनाक्रम सामने आया. एक दिन पहले मामले के आरोपियों को जमानत मिलने की जानकारी सामने आने के बाद पूरे इलाके में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. मृतक के परिजनों, ग्रामीणों और कई सामाजिक वर्गों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई. सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बना रहा और कानून-व्यवस्था, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे.
इसी बीच देर रात करीब 11 बजे प्रतापपुर पुलिस ने ग्राम केवरा में दबिश देकर सभी 10 आरोपियों को फिर हिरासत में लिया. पुलिस ने प्रतिबंधात्मक कानूनी कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. देर रात हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में हत्याकांड एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया. बड़ी तादाद में पुलिस बल की मौजूदगी में आरोपियों को गांव से लेकर न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी की गई. जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया.
गौरतलब है कि ग्राम गोंदा निवासी भाजपा युवा नेता हरिनंदन राजवाड़े को कथित रूप से घर से उठाकर ग्राम केवरा स्थित अटल चौक ले जाया गया था. आरोप है कि वहां उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई. गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इस घटना ने पूरे प्रतापपुर क्षेत्र को झकझोर दिया था और लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया था.
वारदात के बाद प्रतापपुर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत जुर्म दर्ज किया था. दस्तावेजों के मुताबिक अपराध क्रमांक 211/26 में धारा 296, 351(2), 115(2), 109(1), 140(1), 331(6), 190, 191(2), 191(3) तथा धारा 103(1) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है.
जमानत मिलने की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में लोगों ने गंभीर चिंता व्यक्त की. ग्रामीणों का कहना था कि इतने गंभीर आरोपों वाले मामले में आरोपियों को राहत मिलने से पीड़ित परिवार और गवाहों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं. लोगों ने यह भी कहा कि कानून का मकसद सिर्फ जुर्म दर्ज करना नहीं. बल्कि पीड़ित पक्ष में इंसाफ का भरोसा कायम रखना भी है. कई लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच, प्रभावी अभियोजन और पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया की मांग उठाई.
सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं. कई लोगों ने यह सवाल उठाया कि गंभीर धाराओं वाले मामलों में कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता बनी रहनी चाहिए. हालांकि जमानत देना या न देना अदालत का अधिकार क्षेत्र है और यह उपलब्ध सबुतों, तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय किया जाता है.
देर रात हुई पुलिस कार्रवाई के बाद जिन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया उनमें भुनेश्वर प्रसाद राजवाड़े, सकल प्रसाद राजवाड़े, आशुतोष राजवाड़े, सुनील राजवाड़े, रज्य गुप्ता, शिवम कुमार राजवाड़े, मनोज कुमार राजवाड़े, शिव कुमार राजवाड़े, ललित कुमार राजवाड़े तथा राजू राजवाड़े, सभी निवासी ग्राम केवरा, थाना प्रतापपुर, जिला सूरजपुर शामिल हैं.
मृतक के परिजनों ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच, प्रभावी अभियोजन और दोषियों को कानून के मुताबिक कठोर दंड दिलाने की मांग दोहराई है. वहीं क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़नी चाहिए. ताकि आम जनता का कानून और न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे.
अब सभी आरोपियों के फिर जेल भेजे जाने के बाद यह मामला एक बार फिर नई दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है. फिलहाल पूरे प्रतापपुर क्षेत्र की निगाहें पुलिस की आगे की जांच, अभियोजन की कार्रवाई और अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं. आख़री फैसला अदालत मिले सबूतों, गवाहों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर करेगा.
2026-07-29











