कलेक्टर आदेश देने पर भी आज नहीं बनाऊंगा “- अमलीपदर तहसील कार्यालय के सामने गूंजे लोक सेवा केंद्र कर्मी के अड़ियल बोल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर चोट: अमलीपदर लोक सेवा केंद्र में कर्मचारी की तानाशाही, ग्रामीणों की शिकायत पर भड़के ऑपरेटर ने पत्रकारों को ही कैमरे पर घेरा
गरियाबंद : मैनपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले अमलीपदर तहसील कार्यालय परिसर में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया. जब लोक सेवा केंद्र (LSK) के एक कर्मचारी ने न सिर्फ अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया. बल्कि कवरेज करने गए स्थानीय पत्रकारों के साथ भी सरेआम बदसलूकी और तानाशाही की.
ग्राम पंचायत धारनीधोड़ा सहित आसपास के दर्जनों ग्रामीणों ने लोक सेवा केंद्र के ऑपरेटर प्रकाश कुमार पटेल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि काम कराने के एवज में उन्हें महीनों से भटकाया जा रहा है. जब इस अव्यवस्था को लेकर मीडिया ने सवाल दागे. तो जवाब देने के बजाय कर्मचारी खुद मोबाइल चालू कर पत्रकारों को ही धमकाने और उनसे उलटे सवाल करने लगा.
इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. ”आज आओ, कल आओ” के चक्कर में बीता एक महीना कुहीमाल और आसपास के ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय के सामने मीडिया को आपबीती बताते हुए कहा कि वे अपने जरूरी “प्रमाण पत्र “और शासकीय कार्यों के लिए लोक सेवा केंद्र के चक्कर काट रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि ऑपरेटर प्रकाश कुमार पटेल उन्हें “आज आने से कल आना” कहकर पिछले एक महीने से टरका रहा है.
हद तो तब हो गई जब कर्मचारी ने ग्रामीणों से दोटूक कह दिया- “कलेक्टर आदेश देने से भी आज नहीं बनाऊंगा, अपना फॉर्म वापस ले लो.” दूर-दराज के गांवों से पैसे और समय खर्च कर तहसील पहुंचने वाले गरीब ग्रामीणों के साथ शासकीय संस्थान में इस तरह का बर्ताव प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलता है.
जवाबदेही से बचने के लिए पत्रकारों पर ही तान दिया कैमरा
जब स्थानीय पत्रकारों ने पीड़ित ग्रामीणों की आवाज बनकर ऑपरेटर प्रकाश कुमार पटेल से इस लेट-लतीफी और अड़ियल रवैये पर सवाल पूछा. तो कर्मचारी अपनी कमियां छुपाने के लिए तानाशाही पर उतारू हो गया. उसने सवालों का जवाब देने के बजाय अपने एक साथी से मोबाइल का कैमरा चालू करवाया और कवरेज कर रहे पत्रकार का व्यक्तिगत रूप से नाम लेकर उनसे ही उलटे सवाल दागने लगा.
खड़े हुए गंभीर सवाल, जनता की सुनने वाला कोई नहीं?
इस पूरे घटनाक्रम ने अमलीपदर तहसील और गरियाबंद जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
•जवाबदेही से क्यों भाग रहे कर्मचारी?
•जब पत्रकार जनता की बुनियादी समस्याओं को लेकर सवाल पूछ रहे थे, तो कर्मचारी को मर्यादा भूलकर पत्रकारों को ही कटघरे में खड़ा करने की जरूरत क्यों पड़ी?
•एक संविदा या केंद्र ऑपरेटर स्तर का कर्मचारी खुलेआम जिला कलेक्टर के नाम पर चुनौती कैसे दे सकता है? उसे किसका संरक्षण प्राप्त है?
•ग्रामीणों के समय और पैसे की बर्बादी का जिम्मेदार कौन?
• एक-एक महीने तक चक्कर कटवाने और फॉर्म वापस लेने की धमकी देने वाले ऐसे कर्मचारियों पर उच्च अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
•प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग:
चौथे स्तंभ का कार्य जनता और प्रशासन के बीच सेतु का होता है। जब जनसमस्याओं को उठाने पर पत्रकारों को ही कैमरे के सामने घेरने की कोशिश की जाएगी, तो आम जनता की आवाज कौन उठाएगा?
स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने गरियाबंद कलेक्टर और अमलीपदर तहसीलदार से इस अड़ियल और तानाशाह कर्मचारी प्रकाश कुमार पटेल को. अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस निरंकुश रवैये पर क्या सख्त कदम उठाता है.

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