इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 3 जून शनिवार को है. इस दिन अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट सावित्री पूर्णिमा व्रत भी है. ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत वाले दिन 3 शुभ योग के साथ विशाखा और अनुराधा नक्षत्र हैं. ये सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ होते हैं. हालांकि ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत भद्रा में है, जो सुबह से रात तक है. इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत के दिन पूर्णिमा का स्नान और दान नहीं होगा, इसका कारण पूर्णिमा तिथि है. तिरुपति के
ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पर बने शुभ योग और ज्येष्ठ पूर्णिमा स्नान-दान के बारे में.
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 2023 मुहूर्त
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 3 जून शनिवार को सुबह 11 बजकर 16 मिनट से लग रही है और यह 4 जून रविवार को सुबह 09 बजकर 11 मिनट तक रहेगी. चंद्र व्यापिनी तिथि के आधार पर ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 3 जून को रखा जाएगा.
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 2023 चंद्र अर्घ्य समय
इस दिन चंद्रोदय शाम 06 बजकर 39 मिनट पर होगा. जो लोग व्रत रहेंगे, वे शाम को इस समय पर चंद्रमा की पूजा करके अर्घ्य दे सकते हैं. पूर्णिमा के व्रत में चंद्रमा का अर्घ्य महत्वपूर्ण माना जाता है.
3 शुभ योग में ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत
शिव योग: सुबह से लेकर दोपहर 02 बजकर 48 मिनट तक
सिद्ध योग: दोपहर 02 बजकर 48 मिनट से देर रात तक
रवि योग: सुबह 05 बजकर 23 मिनट से सुबह 06 बजकर 16 मिनट तक
ज्येष्ठ पूर्णिमा का स्नान और दान
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत में चंद्रमा की पूजा पूर्णिमा तिथि की रात में करते हैं. इस वजह से ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 3 जून को है, जबकि ज्येष्ठ पूर्णिमा का स्नान और दान उदयातिथि में करते हैं, इसलिए ज्येष्ठ पूर्णिमा का स्नान और दान 4 जून रविवार को होगा. इस दिन सूर्योदय काल से स्नान करें और चावल, खीर, दूध, चांदी, सफेद वस्त्र, सफेद फूल आदि का दान करें. इससे चंद्रमा का आशीर्वाद मिलेगा.
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पर भद्रा का साया
3 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पर भद्रा का साया है. इस दिन भद्रा सुबह 11 बजकर 16 मिनट से रात 10 बजकर 17 मिनट तक है. हालांकि इस भद्रा का वास स्वर्ग में है, इसलिए इसका दुष्प्रभाव पृथ्वी पर नहीं माना जाता है.
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत: अखंड सौभाग्य प्राप्ति का संयोग
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत वाले दिन वट सावित्री पूर्णिमा व्रत है. इस दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. देवी सावित्री, वट वृक्ष तथा सत्यवान की पूजा करती हैं. उनके आशीर्वाद से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है.











