भगवान गणेश ने यहां लिखी थी महाभारत, जानें धर्म ग्रंथ की रचना की अद्भुत कहानी

Spread the love

उत्तराखंड के चमोली जिले के कई गांव खास हैं और उन्हीं गांवों में से एक है माणा गांव, क्योंकि यह वहीं स्थान है जहां बैठकर व्यास जी ने महाभारत की कथा का वाचन किया था और गणेश गुफा में बैठकर गणेश जी ने कथा लिखी थी. यह गांव बद्रीनाथ धाम से महज 3 किमी की दूरी पर है, जहां पर प्राचीन गणेश गुफा स्थित है. गुफा में भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित है. आज भी यहां देश विदेश से भक्त गणेश और महर्षि देव व्यास के दर्शन करने आते हैं.

इस तरह हुई महाभारत की रचना

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की कथा लिखने के लिए भगवान श्रीगणेश जी को याद किया. उन्होंने गणेश जी से महाभारत लिखने का अनुरोध किया, जिस पर गणेश ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया. कहा जाता है कि गणेश जी ने महर्षि वेद व्यास के समक्ष एक शर्त रख दी. गणेश जी ने महर्षि वेद व्यास से कहा कि आपको महाभारत कथा बिना रुके लगातार सुनानी होगी. इस पर महर्षि वेद व्यास ने भी गणेश से शर्त रखी कि बिना वाक्य को समझे उसे नहीं लिखेंगे. इसके बाद महाभारत लिखना शुरू किया गया.

जब गणेश जी वाक्य को समझते तब तक महर्षि को सोचने के लिए समय मिल जाता. इस तरह महर्षि वेद व्यास और भगवान श्री गणेश ने महाभारत की रचना की थी. पूर्व धर्माधिकारी भुवन उनियाल बताते हैं कि भगवान व्यास ने गणेश जी का यहीं पर आवाहन किया था, जिसके बाद गणेश जी ने इसी गणेश गुफा में बैठकर पुराणों को लिखना शुरू किया.

ऐसे पहुंचे गुफा तक

गणेश गुफा पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले माणा गांव आना होगा और माणा गांव से कुछ दूरी पर गणेश गुफा, व्यास गुफा, मुचकुंद गुफा स्थित है. माणा गांव तक सड़क कनेक्टिविटी पूर्णतया सुचारू है. वहीं, निकटतम एयर सेवा गौचर तक ही मिलती है और निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश, देहरादून है.

 

Author