सिटी बसों में सफर करने वाले लोगों की परेशानी फिलहाल जल्दी खत्म नहीं होगी। निगम ने बस ऑपरेटर को 67 सिटी बसें सौंपी थी उसमें से 17 पूरी तरह से कबाड़ हो चुकी हैं। इन्हें बेचा जा रहा है। 8 बसें खराब हैं और 6 को स्पेयर में रखा गया है। इन्हें तभी उपयोग में लाया जाता है जब किसी रूट की बस खराब होती है। मतलब कुल 36 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही है।
ऑपरेटर ने निगम और प्रशासन से नई सिटी बसें मांगी थी, लेकिन अफसरों ने साफ मना कर दिया है। उनका कहना है कि नई बसों की खरीदी की प्रक्रिया अब चुनाव के बाद ही शुरू की जाएगी। अगले महीने से आचार संहिता लगने की वजह से भी अफसर अभी किसी भी नई खरीदी पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। इसलिए यह तय हो गया है कि शहर की करीब 20 लाख आबादी के लिए केवल 36 सिटी बसों के भरोसे रहना होगा। इससे लोगों के सामने परिवहन के लिए संकट खड़ा हो गया है।
बस स्टैंड और एयरपोर्ट जाने लग रहा दोगुना किराया
शहर में सिटी बसें कम होने की वजह से ऑटो और कैब वालों की मनमानी बढ़ गई है। नया बस स्टैंड और एयरपोर्ट आने-जाने के लिए मनमाना किराया वसूल किया जा रहा है। स्टेशन से बस स्टैंड जाने के लिए 150 से 250 तो एयरपोर्ट जाने के लिए 800 रुपए तक वसूल किए जा रहे हैं। ज्यादातर रूट पर सिटी बसें नहीं चलने की वजह से ऑटो वाले दोगुना किराया ले रहे हैं। ज्यादातर ई-रिक्शा मालवीय रोड, सदरबाजार, स्टेशन रोड, फाफाडीह, देवेंद्रनगर, शंकरनगर जैसे इलाकों में ही चल रहे हैं। इसलिए आउटर और ज्यादा दूरी वाली जगहों पर पहुंचने के लिए लोगों को ऑटो में ही बैठना पड़ रहा है। इसका फायदा ऑटो वाले उठा रहे हैं। वे लोगों से अपना तय किया गया किराया ही वसूल करते हैं।
एयरपोर्ट की सिटी बसें एक महीने भी नहीं चलीं
करीब एक महीने पहले दुर्ग, भिलाई से रायपुर होते हुए एयरपोर्ट तक दो नई सिटी बसें शुरू की गई थी। लेकिन दोनों एसी सिटी बसें 25 दिन भी नहीं चल पाई। दोनों बसों के परमिट के खिलाफ निजी बस वालों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। उनका कहना है कि इन रुट पर पहले से बसों को परमिट जारी किया गया है। ऐसे में नई बसों को परमिट नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई तक एयरपोर्ट रूट पर चलने वाली सिटी बसों के संचालन पर रोक लगा दी है।
घनी आबादी वाले रूट पर एक भी बस नहीं
शहर के कई घनी आबादी वाले एरिया हैं जहां एक भी सिटी बस नहीं चलाई जा रही है। स्टेशन से टाटीबंध, सरस्वतीनगर, सरोना, आमानाका, कबीरनगर, हीरापुर जरवाय जैसे आउटर के इलाके की डेढ़ लाख से ज्यादा की आबादी के लिए एक भी सिटी बस नहीं है। स्टेशन से टाटीबंध, एम्स अस्पताल, माना, चंपारण, नया बस स्टैंड, कुम्हारी के अलावा शहर के प्रमुख चौक से पुराना धमतरी रोड, विधानसभा चौक से पुराना रायपुर होते हुए नया बस स्टैंड तक एक भी सिटी बस नहीं चल रही है।
मेंटनेस और टैक्स माफ करने पर विवाद
सिटी बसों के संचालन के राज्य सरकार ने बस ऑपरेटर को बड़ी राहत दी थी। सिटी बसों पर बकाया तीन साल का टैक्स जो करीब 2.40 करोड़ था, उसे माफ कर दिया गया था। इतना ही नहीं एक सिटी बस सुधारने करीब 2 लाख रुपए दिए गए थे। अब इस छूट और सर्विसिंग रकम देने पर विवाद शुरू हो गया है। निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि अफसरों ने मिलीभगत कर ऑपरेटर को फायदा पहुंचाया है। बड़ी रकम देने के बाद भी ऑपरेटर 50 बसों को भी सड़क पर नहीं उतार पाया।










